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बवासीर के प्रकार कितने होते हैं – Types Of Piles & Stages

जानिये पाइल्स के प्रकार इन हिंदी के बारे में, यह कितने तरह के होते हैं आदि. बवासीर एक ऐसा रोग हैं जिसका ज्यादातर मजाक बनाया जाता हैं, लेकिन यहां यह मजाक का विषय नहीं हैं. क्योंकि बवासीर एक ऐसा रोग हैं जिसे कोई भी नहीं चाहता की उसे हो, इसे बहुत ही गन्दी नजर से देखा जाता हैं.

(Diseases) piles types – पाइल्स रोग होने के पीछे यह आम वजह होती हैं, जैसे बैठने का गलत तरीका, ज्यादा देर तक एक ही जगह पर बैठना, ज्यादा देर खड़े रहना, महिलाओ में गर्भवस्था होने के पर, शरीर का ज्यादा वजन होने पर, लम्बे समय तक कब्ज रोग होने के वजह से आदि यह सामान्य वजहें हैं, इनसे हम सबको बचना चाहिए.

बवासीर के टाइप्स जानने के लिए पोस्ट पूरा निचे तक जरूर पड़ें, निचे तक.

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बवासीर के प्रकार कितने तरह के होते है

Types Of piles bawaseer in Hindi

  • कई बार तो रोगी को मस्से होकर अपने आप चले भी जाते हैं और रोगी को मालूम भी नहीं पड़ता.

आयुर्वेद में पाइल्स बवासीर के दो प्रकार माने गए हैं, सहज और अर्जित. आगे पढ़िए बवासीर कितने प्रकार के होते है ?

1. सहज बावसीर पाइल्स (Piles By Genetics)

पिता या माता को बवासीर (piles) का रोग रहने से जन्म काल से पिता माता कार्तिक बवासीर रोग करक निदान सेवित हो तो पुत्र को भी बवासीर का रोग हो जाता हैं. इसे इंग्लिश में जेनेटिक्स भी कहते हैं, यानी जो खूबी व कमी आपके मात्रा-पिता के शरीर में होगी वही खूबी व कमजोरी आपके शरीर में भी होगी.

पैतृक दोष के कारण बावसीर रोग परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता हैं. इसलिए इसे सहज बवासीर कहते हैं.

  • चरक कहते हैं –

प्रकृति में गुदा बल के बीज में विकृति होने से सहज बवासीर की उतपत्ति होती हैं, क्योंकि स्त्री बीज और पुरुष बीज में शरीर के प्रत्येक अंग का निर्माण करने वाले सूक्ष्म बीजावयव रहते हैं. उनमे से जिस अंग के मूल बिजवायव की विकृति होती हैं, उसी अंग में विकार भी उत्पन्न हो जाते हैं.

  • सहज बावसीर के मस्से

सहज पाइल्स बवासीर में मस्से सुंडाकर, कर्कश, अरुण या पाण्डु वर्ण के होते हैं. उनका मुंह भीतर की तरफ रहता हैं. इस रोग से पीड़ित रोगी दुखी, अल्पाहारी, धीमी आवाज से बोलने वाला, क्रोधी, शिरव्याप्त देहवाला, अल्पज्ञा और आंख, कान, नाक और शिरोरोग से पीड़ित रहता हैं. साथ ही पेट में गुड-गुड शब्द आंत्रकुंजन, हृदय में, उप, अरुचि आदि उपद्रव दिखाई देते हैं.

2. शरीर दोष द्वारा अर्जित बवासीर (पाइल्स टाइप्स)

कब्ज, गुदा स्थान की शिराओं पर अनावश्यक दबाव आदि के कारण होने वाले बवासीर पाइल्स रोग के बारे में हम पिछले लेख में आपको बता चुके हैं. अनियमित जीवन शैली से होने वाला बवासीर रोग के कई प्रकार होते हैं,इनमे सामान्यतः दो प्रकार का बावसीर ज्यादातर देखने को मिलता हैं 1. बादी और 2. खुनी

बादी बवासीर (सूखा) Badi Piles

बादी पाइल्स बवासीर को सूखा बावसीर भी कहते हैं और ब्रह्माश भी कहते हैं, क्योंकि यह प्रथम गुदा बलि में होती हैं. इसके मस्सों में रक्तस्राव नहीं होता. इसके मस्से बाहर आसानी से देखे जा सकते हैं. इनमें बार-बार शोथ, जलन और खुजली उत्पन्न होती हैं. इनके ऊपर त्वचा का आवरण होता हैं.

साधारण अवस्था में जब ये खाली होते हैं, तब प्रतीत नहीं होते, लेकिन प्रकुपित होने पर रक्त से भरकर ये फूल जाते हैं और हर एक शिरा का अंतिम भाग एक छोटा सा अंकुर या गांठ जैसा मालुम होने लगता हैं. जब तक इनमें डाह, शोथ या वरन न हो तब तक ये दुःख नहीं पहुंचाते, पर अपथ्य से मलावरोध होने पर ये फूलकर नीले रंग के हो जाते हैं और वहां पर रक्त जमकर शोथ हो जाता हैं, जिससे असहनी वेदना होती हैं. ये मस्से जब दबते हैं, तब रोगी पीड़ा से छटपटाने लगता हैं.

वह सुगमता से चल-फिर भी नहीं सकता, बैठने में भी उसे तकलीफ होती हैं. इसके लिए सही उपचार की जरुरत होती हैं. अगर फिर भी यह ठीक न हो तो फोड़ा या कैंसर का रूप धारण कर लेते हैं. तब स्थिति और भी भयानक हो जाती हैं.

बादी पाइल्स, बादी बवासीर रोग को डकार, कब्ज, छाती की सूजन, खांसी, श्वास, कष्ट, सूखा मल, या फेनवाला मल, चिकना और पीड़ा के साथ आता हैं. रोगी की चमड़ी, नख, आंख, मुख काला, फीका, पीला या सफ़ेद पड़ जाता हैं.

खुनी बवासीर पाइल्स (Bloody Piles Bleeding)

खुनी बवासीर को आद्र बवासीर भी कहते हैं. इसमें मस्से से रक्स्राव होता हैं, यानी मस्सों से खून बहता हैं. इस तरह के बवासीर को आतंरिक बवासीर के नाम से भी पुकारा जाता हैं, क्योंकि इसके मस्से गुड़ाष्ट से डेढ़ अंगुल ऊपर पाए जाते हैं. यह बादी पाइल्स से ज्यादा हानिकारक होता हैं. इसमें मल के बोझ से जब मस्से दबते हैं, तब गरम-गरम खून निकलता हैं. खून अधिक निकलने से रोगी पीला, क्रश तथा हड्डी के पिंजरे जैसा दिखने लगता हैं.

ऐसे में लगातार बवासीर पाइल्स में से खून निकलते रहने से रोगी का उत्साह कम हो जाता हैं, उसे श्वास-कष्ट होता हैं, शक्ति क्षीण हो जाती हैं, पाखाना सूखा, कठिन या काले रंग का उतरता हैं. भूख कम हो जाती हैं. अधोवायु नहीं छूटती और खट्टे पदार्थ खाने से मुख तथा पांवों पर सूजन आ जाती हैं.

खुनी बवासीर के मस्सों में भी एक प्रकुपित शिरा और उसके चारों और संयोजक तंतु होते हैं.ये तंतु मस्सों के पुराने होने पर कड़े और संख्या में अधिक हो जाते हैं. मलाशयके अंतिम एक या दो इंच भाग पर चारों और बवासीर के मस्से उत्पन्न हो जाते हैं. शुरुआत में यह बहुत मुलायम होते हैं और मल त्याग के समय गुदा के ऊपर बाहर निकल आते हैं.

इनके फट जाने से रक्त अधिक गिरता हैं, जिससे शरीर में रक्ताल्पता उत्पन्न हो जाती हैं. मस्सों के बाहर निकल आने पर कभी-कभी वे फिर से भीतर नहीं जा पाते और बाहर ही निकले रहते हैं. तब रोगी को और भी ज्यादा दर्द होता हैं. ऐसी स्थिति पैदा होने पर मस्सों को हाथ से ठेलाकर भीतर करना पड़ता हैं, जिससे रक्तस्राव और भी बढ़ जाता हैं.

The Four Stages Of Piles

Piles Types & Stages

  • पाइल्स की चार स्टेजेस होती हैं, जिसमे पहली स्टेज में रोगी को दर्द बहुत कम होता हैं, व खून भी न के बराबर निकलता हैं. ऐसे ही धीरे-धीरे पाइल्स के स्टेजेस गंभीर होते जाते हैं. इसमें सबसे ज्यादा गंभीर और हानिकारक चौथी स्टेज होती हैं. इस स्टेज में आने पर रोगी का ऑपरेशन आदि करना पड़ता हैं.

यह ऊपर दिए गए पोस्ट भी जरूर पड़ें, इनमे बवासीर के बारे में और ज्यादा जानकारी और बचने के बारे में खास उपाय बताये है आप इन्हे एक बार जरूर पड़ें.

उम्मीद करते हैं आपको बावसीर के प्रकार कितने होते है types of piles in Hindi को पढ़कर अच्छा लगा हो. हमने पाइल्स बावसीर रोग के विषय में और भी कई जानकारी दी हैं, आप उन्हें भी पड़ें ताकि आपको इस रोग के बारे में पूरी तरह ज्ञान हो जाए. यहां हमने आयुर्वेदिक नुस्खे, घरेलु उपाय आदि सब कुछ दिए हैं. अगर अपने उन्हें नहीं पड़ा हैं तो यहां अभी पढ़ सकते हैं.

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