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बवासीर का होम्योपैथिक इलाज – Homeopathic Treatment For Piles

Bawaseer – बवासीर और कुछ नहीं सिर्फ कब्ज का ही एक गंभीर रूप हैं. इसे के बारे में हम यहां आज आपको बवासीर का होम्योपैथिक इलाज बताएंगे इन हिंदी भाषा में. इसके आलावा हमने पाइल्स के ढेरों उपाय भी बताये हैं, piles homeopathic treatment (in homeopathy)के साथ साथ आप उन्हें भी जरूर पड़ें, होमियोपैथी दवा homeopathy medicine for piles.

Quick Info : पाइल्स, जिसे हिंदी भाषा में बवासीर भी कहते हैं, यह दो तरह का होता हैं, एक होता हैं “खुनी (bloody piles) इसमें रोगी के मास्सा में से खून बहता हैं, इसे रक्तसिर भी कहते हैं. दूसरा बवासीर होता हैं “बादी” इसमें खून नहीं बहता बल्कि मस्से ही रहते हैं, यह खुनी बवासीर से ज्यादा दर्द देता हैं.

यह बवासीर के मस्से भी दो तरह के होते हैं आतंरिक व बाहरी (internal and external piles) शुरुआत में यह गुदाद्वार के अंदर ही रहते हैं लेकिन अगर समय पर इनका उपचार नहीं किया जाये तो यह मलद्वार के बाहर निकल आते हैं, इसे बाहरी बवासीर कहते हैं, होम्योपैथिक मेडिसिन फॉर पाइल्स इन हिंदी.

अगर आप पाइल्स के आयुर्वेदिक नुस्खों के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह जानकारी जरूर पड़ें – 100% पाइल्स का इलाज – Piles Treatment At Home 151 Remedies

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बवासीर – Best Piles Homeopathic (Homeopathy) Treatment Medicines in Hindi

यह दर्दनिय रोग पेट में कब्ज लम्बे समय तक बनी रहने पर होता हैं, कई लोगों को यह जेनेटिक्स के वजह से भी होता हैं, लेकिन बवासीर रोग का मुख्या कारण कब्ज, अपचन, मल को रोकना, समय पर शौच न करना आदि ही होते हैं. इस बात को एक शब्द में कहां जाए तो वह है “अनियमित जीवन-शैली ” यानी अप्राकृतिक जीवन. चलिए अब आगे पाइल्स खुनी व बादी बवासीर का होम्योपैथिक इलाज उपचार के बारे में दवाइयों के बारे में पढ़ते हैं. the best piles homeopathic treatment at home (homeopathy) घर पर ही पाए इससे निजात.

बवासीर की 20 दवा – आसान बवासीर का होम्योपैथी इलाज घरेलु उपचार

  • (1). एकोनाइट 30

एकोनाइट 30 : अगर किसी बवासीर पाइल्स के रोगी को गुदा द्वार में से चमकीले लाल रंग का खून आये तो उसे इस दवा का दिन में 2 बार सेवन करना चाहिए. इसके सेवन से खुनी बवासीर में अति लाभ होता हैं.

  • (2). हैमामेलिस Q 

हैमामेलिस Q : किसी भी पाइल्स के रोगी के गुदाद्वार में से अगर काले रंग का खून निकले तो उसे इस होम्योपैथिक दवा से इलाज करना चाहिए. इस दवा को 10-10 बून्द की मात्रा में दिन में 2 बार सेवन करना चाहिए, ऐसा करने से मलद्वार से काल खून निकलना बंद हो जाता हैं, यह काले रंग का रक्तस्राव का होम्योपैथिक उपाय हैं.

  • (3). डोलिकोस Q 

डोलिकोस Q : खुनी बवासीर (blood piles) में यह homeopathic treatment की दवा बहुत ही लाभदायक होती हैं. इसके मूल आरक की एक एक बून्द दिन में तीन बार लेना चाहिए (बवासीर में खून बहने पर क्या करे).

  • (4) नक्सवोमिका 30 और सुलह 1 एम

नक्सवोमिका 30 और सुलह 1 एम : Homeopathic treatment की यह दवा (medicine) सभी तरह के बवासीर (piles) में लाभप्रद होती हैं. “सल्फर 1M” की एक मात्रा 15 दिन में एक बार सुबह के समय शौच स्नान आदि दैनिक क्रिया करने के बाद खाली पेट “नक्सवोमिका 30” की रोजाना 3 मात्राएं सेवन करनी चाहिए. यह बेहतरीन all types piles homeopathic treatment in Hindi में हैं.

विशेष : जब सल्फर 1M दवा का सेवन किया जाए, तो उसके 1 दिन पहले तथा 2 दिन बाद तक कोई अन्य औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए. ऐसे में यह दवा आपको नुकसान पहुंचा सकती हैं, इसलिए इस दवा के प्रयोग के एक दिन पहले व दवा लेने के दो दिन बाद तक किसी औषधि का सेवन न करे.

नोट : कई पाइल्स का होम्योपैथिक इलाज करने वाले सूर्यास्त के समय नक्सवोमिका 30 तथा सुबह के समय सूर्योदयः से पहले सल्फर 30 देकर भी इस बवासीर रोग का होम्योपैथिक उपचार करते हैं.

  • (5). एसक्यूलस 3 

एसक्यूलस 3 : अगर आप होम्योपैथिक में बादी बवासीर का इलाज खोज रहे हैं, तो आपको बादी बवासीर के लिए इस औषधि से बेहतरीन औषधि मिलना मुश्किल हैं. यह badi piles के लिए सर्वोत्तम हैं. इस दवा का रोगी को दिन में 3 बार सेवन करना चाहिए.

  • (6). म्यूरियटिक एसिड 3 

म्यूरियटिक एसिड 3 : कई बार कम उम्र यानी बच्चों को भी बवासीर रोग हो जाता हैं, ऐसे में छोटे बच्चों के बवासीर पाइल्स का इलाज करने के लिए इस होम्योपैथिक दवा का सेवन करना चाहिए. वयस्कों बड़ी उम्र के व्यक्तियों को नील रंग के मस्से, जिमें स्पर्श असहिष्णुता हो इस लक्षण में दिन में तीन बार इस दवा का सेवन करना चाहिए.

  • (7). इग्नेशिया 200 

इग्नेशिया 200 : कई रोगियों को मल त्याग करते समय जरा सा जोर लगाने पर ही कांच निकल आते हैं और गुदा पर बोझ, दबाव, जलन व दर्द आदि के लक्षणों में रोगी को इस होम्योपैथिक दवा का दिन में एक बार सेवन करना चाहिए.

  • (8).रसटाक्स 30

रसटाक्स 30 : बवासीर में शौच मल टीगा करते समय मस्सों का बाहर निकलना गुदा पर बोझ बने रहने का अनुभव आदि इन लक्षणों में इस दवा को दिन में तीन बार लेना चाहिए. इन लक्षणों में पाइल्स का होम्योपैथिक इलाज में यह दवा श्रेष्ट मानी जाती हैं.

रामबाण दवा औषधि – Homeopathic Medicines For Piles

  • (9). इस्क्युलस 200 

इस्क्युलस 200 : अगर किसी पाइल्स के रोगी को मलद्वार में सुई की चुभन से महसूस होती हो, जलन महसूस होती हो तो रोगी को इस होम्योपैथिक दवा का सेवन करना चाहिए. इसकी विधि आप जहां से यह दवा ख़रीदे वहीं से पता कर सकते हैं.

  • (10). कालिकार्ब 

कालिकार्ब : खुनी बवासीर में (bloody piles), मलद्वार में दर्द होने पर, मलद्वार के चारों तरफ जलन आदि के लक्षणों में कालिकार्ब को लगाना चाहिए. इसके प्रयोग से इन सभी लक्षणों में लाभ होता हैं. बेहतरीन खुनी मास्सा का होम्योपैथिक इलाज हैं.

  • (11). मूलेन आयल 

मूलेन आयल : अगर किसी व्यक्ति या बवासीर के रोगी को मलद्वार में खुजली होती हो, यह खुजली चाहे हलकी सी हो या तेज, इसके होने पर रोगी को मूलेन आयल नमक इस दवा का प्रयोग करना चाहिए. यह आसान साधारण सा पर्यायोग आपको अति राहत देगा.

  • (12). रेडियम 12 या फिर 30

रेडियम 12 या फिर 30 : रोगी अथवा किसी भी व्यक्ति को मलद्वार में बवासीर के मास्सा में लगातार खुजली होती हैं तो इस स्थिति में रेडियम 12 या फिर 30 का सेवन करना चाहिए, जलन में जल्द ही आपको रहत महसूस होने लगेगी.

  • (13). आडोरेटा मूलार्क 

आडोरेटा मूलार्क : अगर किसी व्यक्ति को अभी अभी बवासीर (पाइल्स मास्सा) का रोग हुआ हैं तो ऐसे रोगी को इस दवा का सेवन जरूर करना चाहिए. इसकी तीन चार बूंदो के प्रयोग से रोगी को बहुत राहत मिलेगी.

  • (14). एमोनम्यूर 6,30 या 200 

एमोनम्यूर 6,30 या 200 : महिलाओ में मासिक धर्म के समय का बवासीर, मल त्याग के बार मस्सों का बाहर निकलना, कष्टपूर्ण खुजली, खुनी बवासीर (bloody piles), बवासीर के मास्सा का दर्द, गांठ के रूप में कड़ा मल त्याग होना आदि लक्षणों में इस औषधि का प्रयोग लाभदायक होता हैं. मासिक धर्म में बवासीर, पाइल्स होम्योपैथिक ट्रीटमेंट की औषधि इन हिंदी में.

  • (15). लाइकोपोडियम 3,6,30 या 200 

लाइकोपोडियम 3,6,30 या 200 : अगर किसी व्यक्ति को यकृत के रोग के साथ-साथ बवासीर (piles), रक्तस्राव खून बहना या मलद्वार में ज्यादा दर्द हो तो इन लक्षणों में इस औषधि का प्रयोग लाभप्रद होता हैं.

  • (16). सल्फर 3, 4 या 200 

सल्फर 3, 4 या 200 : पुरानी से पुरानी बवासीर, बवासीर में खून बंद हो जाने पर सर दर्द (headache in piles), मलद्वार में डांक मारने जैसी पीड़ा, ज्यादा दर्द होना आदि यह लक्षण हो तो इस होम्योपैथिक इलाज की औषधि का प्रयोग लाभप्रद रहता हैं.

  • (17). हैमामेलिस मूलार्क 

हैमामेलिस मूलार्क : मलद्वार में दर्द, कमर में दर्द, खुनी बवासीर आदि इन लक्षण में इस औषधि के 1 ड्राम मूलार्क को या 2 अथवा 6 पोटेंसी को 8 ड्राम जैतून के तेल (ओलिव आयल) में मलहम बनाकर स्थानीय गुदा में प्रयोग करना चाहिए. इसके प्रयोग से उपयुक्त लक्षण ख़त्म हो जाते हैं.

  • हाइड्रैस्टिस मूलार्क 3 या 200 : पुराने आमवात से पीड़ित रोगी को बवासीर होने की शिकायत में यह औषधि अति उपयोगी होती हैं.
  • हिपर सल्फ 3 या 200 : ज्वर में शीतावस्था तथा उससे पहले पित्ती निकलने तथा बवासीर के तीव्र कष्ट में लाभदायक होती हैं.
  • कॉलिफ्लोर 6 या 30 : गुदा के भीतर मास्सा होना, कांच निकलने का भय तथा कब्ज आदि के लक्षणों में यह कॉलिफ्लोर अति फायदेमंद होती हैं.
  • पालिगोनम मूलार्क : पाखाना पतला, बवासीर में दर्द होना आदि इन लक्षण में दवा के मूलार्क की 5-7 बूंदें दिन में 2 बार सेवन करना चाहिए.
  • आर्सेनिक एल्ब से C.M तक की शक्ति पोटेंसी में : मल द्वार गुदा द्वार में जलन होना, गर्मी तथा मल त्याग के समय कष्ट होने पर इस औषधि का प्रयोग हितकर होता हैं.

Reckeweg R13 (Homeopathy Treatment)

कब्जियत होने पर, पेट भारी-भारी सा लगने पर, खुनी बवासीर में, गुदाद्वार में खुजली व जलन होने पर, मल का कठोर होने पर, अपचन होने पर, मल त्याग करने के बाद भी दर्द होना आदि इन सभी लक्षणों में इस दवा का उपयोग किया जा सकता हैं.

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यह डॉक्टर रेचकेवेग की दवा हैं, इससे बवासीर का होम्योपैथिक उपचार बड़ी आसानी से किया जा सकता हैं. हमने जितने भी लक्षण आपको बताये हैं उन सभी लक्षणों में यह औषधि रामबाण होती हैं. इस दवा को आप दिन में 3 बार 10-15 बून्द एक चौथाई कप पानी के साथ लें. शुरुआत में 10-15 बून्द दिन में 4-6 बार लें, जब आपका बवासीर रोग, पाइल्स पूरी तरह से अच्छा हो जाए तो थोड़े ज्यादा समय तक इसी अनुपात में दिन में दो या तीन बार लेते रहे.

खुनी बवासीर (blooding piles) में अगर R31 के साथ में R13 भी ली जाए तो इससे रक्तसिर खून बहने वाले बवासीर में अति लाभ होता हैं. काफी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं.

तो मित्रों क्या आपको खुनी बादी बवासीर का होम्योपैथी इलाज घरेलु उपचार इन हिंदी के बारे में पढ़कर कैसा लगा, ध्यान दें : इन दवाओं को किसी भी स्थान से लेते वक्त वहां पर दुकानदार को अपने रोग के बारे में भी बता दें, व एक बार यह भी पूछे की इसे किस तरह से लेना हैं, ऐसा करने से piles homeopathic treatment in Hindi करने में बहुत आसानी होगी (homeopathy Medicines). आप उन्हें अपने बवासीर रोग के बारे में सब कुछ बता दें, ताकि वह आपको आंखों देखि सलाह दे सके. अन्य घरेलु उपाय जानने के लिए पिछले लेख जरूर पड़ें.

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