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12 Ways To Cure Piles Naturally – बवासीर का प्राकृतिक उपचार

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जानिए कैसे प्राकृतिक घरेलु उपाय से पाइल्स, बवासीर के मस्सों का इलाज व उपचार किया जा सकता हैं. यहां हम आपको ऐसे ही कुछ सरल व प्रयोग में आसान प्राकृतिक उपाय बताने वाले हैं, जिनसे आपको मस्से के रोग में बहुत आराम मिलेगा the best natural treatment for piles in Hindi बवासीर रोग.

पाइल्स यानी बवासीर आज के युग में काफी तेजी से बढ़ता जा रहा हैं. एक ऐसा समय था जब बवासीर यानी मस्से का रोग ज्यादा उम्र के लोगों यानी वृद्धों को हुआ करता था, और एक आज का समय जहां पर बवासीर मस्से का रोग कम उम्र के लोगों को भी होने लगा हैं. यह सारी परेशानियां जीवन को प्रकृति के ढंग से न जीने के वजह से उत्पन्न हुई हैं.

पिछले लेख जरूर पड़ें – हमने पीछे लेख में पाइल्स के आयुर्वेदिक नुस्खे के बारे में पूरी जानकारी दी हैं व यह भी बताये हैं की यह रोग क्यों और कैसे होता हैं खुनी, बादी इन सब के बारे में जानकारी दी हैं. अगर आपने उसे नहीं पढ़ा तो आप उसेइस जानकारी को पढ़ने के बाद यहां पर पढ़ सकते हैं >> Piles Treatment At Home 151 Remedies – पाइल्स का इलाज

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बवासीर का प्राकृतिक उपचार व इलाज सरल घरेलु उपाय

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यहां हमने कई तरह के सरल उपाय बताये हैं, आपसे गुजारिश हैं की आप सभी को बारी-बारी से पड़ें. ताकि आपको आपके लायक सरल उपाय मिल जाए. क्योंकि अक्सर व्यक्ति जल्द बाजी में अधूरी जानकारी पढता हैं और फिर उस अधूरी जानकारी को पाने के लिए तरह-तरह की कोशिश करता हैं.

कमर की गीली लपेट (बवासीर रोग में प्रयोग )

कमर की गीली लपेट के लिए 7-8 फुट लम्बा और 6 इंच चौड़ा एक सूती कपड़ा लेकर ठन्डे पानी में भिगोकर थोड़ा निचोड़ देना चाहिए. फिर उसे पेडू (Pelvis region) से लेकर पीछे कमर के भाग तक चारों और इस प्रकार लपेटना चाहिए की कपडा अच्छी तरह से त्वचा को छूता रहे. उसके ऊपर इतना ही लम्बा चौड़ा सूखा ऊनि कपड़ा लपेटना चाहिए और उसे सेफ्टी पिन या पतली रस्सी से इस तरह बांध देना चाहिए की ढीला न हो पाए.

इस पट्टी को शाम के भोजन के ढाई घंटा बाद बांधना चाहिए. यह पट्टी डेढ़ से दो घंटे तक या साड़ी रात बंधी रहनी चाहिए.

क्या आप जानते हैं पाइल्स कितने तरह के होते हैं, व इनकी कितनी स्टेजेस होती हैं. अगर नहीं जानते तो इस जानकारी को पढ़ने के बाद आप Piles Type & Stages को जरूर पड़ें.

शुष्क घर्षण स्नान (Subtle Bath for Piles )

शुष्क घर्षण स्नान के लिए अपनी हथेलियों से शरीर के अंग-प्रत्यंग को सिर से पैर तक अच्छी तरह और तेजी से इतना रगड़ना चाहिए की समूचे शरीर में लालिमा आ जाए. जांघ और टांगों को रगड़ते हुए घुटनों को सीधा और तना रखना चाहिए. इस स्नान में तेल आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए. इस स्नान के बाद ठन्डे पानी से स्नान करना जरुरी हैं. उसके बाद फिर एक बार घर्षण स्नान आवश्यक हैं.

इसके लिए आप किसी मुलायम कपडे का सहारा ले सकते हैं. एक मुलायम कपडे को लेकर अपने पुरे शरीर पर रगड़े, इसमें किसी भी तरह के तेल व पानी का इस्तेमाल न करे. जब आप पुरे शरीर पर यह घर्षण कर लें तो इसके बात ठाड़े पानी से नाह सकते हैं. यह पाइल्स के नेचुरल ट्रीटमेंट में से एक हैं.

गरम ठंडा कटी स्नान (Natural Treatment Of Piles)

दो टबों में पानी भरे. एक में ठंडा पानी रहे, दूसरे में गरम. पहले गरम पानी वाले तब में 3 मिनट तक बैठें. फिर उठकर तुरंत ठन्डे पानी वाले तब में 3 मिनट तक बैठें. इस तरह तीन बार करे. फिर शरीर को पोंछकर कपडा पहन लें. जब गरम पानी वाले टब में बैठें तो सिरपर ठन्डे पानी से भीगा तौलिया अवश्य रख लें.

आप यहां ऊपर दी गई Video में देख सकते हैं, की कटी स्नान कैसे किया जाता हैं. यह सरल प्राकृतिक घरेलु उपाय हैं, कटी स्नान इससे बवासीर के रोगियों को कई लाभ होते हैं.

रंगीन बोतल में सूर्य तप्त जल और तेल बनाना

जिस रंग की बोतल में सूर्य तप्त जल बनाना हो, उसे खूब साफ़ करके उसमें जल भरकर और काग लगाकर किसी लकडी की पट्टी पर ऐसी जगह रखना चाहिए, जहां 10 बजे दिन से 4 बजे शाम तक धुप रहे. 4 बजे शाम को बोतल उठाकर किसी लकड़ी की आल्मारी मे रख छोड़ें और उसका जल काम में लाये. यह जल 24 घंटे तक दवा का काम देता हैं. बाद में दूसरा जल बना लें. पाइल्स में सामान्य रूप से नील रंग की बोतल का उपयोग किया जाता हैं.

बोतल में जल की जगह तिल्ली आदि का तेल भरकर सूरज के सामने 10 बजे से 4 बजे तक रोज रखा जाए तो 40 दिन में तेल दवा के काम के लिए तैयार हो जाता हैं.

एनिमा (Enema Therapy For Piles)

(एनीमल लेने की यह क्रिया सिर्फ शुरूआती बवासीर के रोगी को ही करना चाहिए, अगर रोगी का बवासीर मास्सा ज्यादा बढ़ गया हैं तो उसे यह एनिमा डॉक्टर की अनुमति से ही लेना चाहिए) किसी तख्ते या खाट पर चित्त (शरीर सीधा रख कर, कमर के बल) लेटकर, अपने दोनों पैरों को मोड़कर एनिमा लेना चाहिए.

एनिमा का पात्र गुदा स्थान से तीन फुट की ऊंचाई पर ढाई सेर के लगभग गुनगुना पानी भरकर टांगना चाहिए. टोंटी से थोड़ा पानी निकालकर उसे गुदा द्वार में अंदर डालकर, आंतों में पानी को जाने देना चाहिए. जैसे ही आप नली को गुदा द्वार में लगाएंगे तो यह पानी अपने आप आंतों में प्रवेश कर जायेगा. जितना पानी जा सके, उतना पानी जाने देने के बाद दो-तीन मिनट रुक कर शौच जाना चाहिए (इसे आप अपनीक्षमता अनुसार ज्यादा देर भी रोक सकते हैं).

यदि एनिमा के पानी में 8-10 बून्द कागजी नीबू का रस भी निचोड़ दिया जाय तो सफाई अच्छी होती हैं. एनिमा लेने के इसके अलावा और भी कई लाभ होते हैं, यानी एनिमा लेने से पेट के सम्बंधित समस्त रोग बिलकुल मिट जाएंगे. जैसे अपचन, गैस, कब्ज, एसिडिटी, मंदाग्नि, पेट दर्द, पेट साफ़ नहीं होना आदि इन सभी रोगों में रामबाण लाभ करता हैं. एनिमा की यह क्रिया दिखने में थोड़ी जटिल व मुश्किल भरी लग रही होगी लेकिन असल में यह हैं नहीं जब आप एक बार इस क्रिया को कर लेंगे तो आपको बाद में बड़ा आसान लगेगा.

देखिये वीडियो में, एनीमा कैसे लिया जाता हैं.

मेहन स्नान (Natural Cure Of Bawasir)

कटी-स्नान वाले टब में एक फुट 6 इंच उंची और 6 इंच चौड़ी काठ की चौकी या ईंट रखें. टब में इतना पानी भरें की पानी चौकी के चारों तरफ आ जाए. पानी ठंडा होना चाहिए. अब चौकी पर नंगे बदन बैठें. लिंग के घुंघट को बाए हाथ की अंगुलियों के बिच पकड़कर खाल के अग्र यानी अगले भाग को किसी मुलायम कपडे को टब के पानी में भिगो भिगोकर उससे धीरे-धीरे छुए या हलके-हलके रगड़ें. स्त्रियां इस स्नान को करते समय अपनी योनि के दोनों तरफ के बड़े होंठों को धीरे-धीरे धोएं. इस स्नान के बाद शरीर को गरम करने के लिए कपडा पहनकर टहलें या कम्बल ओढ़कर एक घंटा लेट जाए.

यह मेहन स्नान महिलाओ के लिए विशेष लाभकारी होता हैं, इस स्नान से महिला व पुरुष के गुप्त अंगों की विकृतियां भी दूर होती हैं.

पांवों की लपेट

टखने से लेकर घुटने तक पैरों को निचोड़े हुए गीले कपडे से लपेट कर ऊपर से उस पर सूखा ऊनि कपडा लपेट देना चाहिए. पैर गरम न रहे तो बिच-बिच में उसपर गरम पानी की थैली या बोतल रख कर उसे गरम रखना चाहिए. लपेट देकर शरीर को कम्बल से ढंकार रखना चाहिए और सिर पर भीगी तौलिया रखनी चाहिए.

घर्षण स्नान

गीले गमछे को दाहिना हाथ ढंकार तथा गमछे का शेष भाग बाए हाथ में अच्छी तरह पकड़ कर दाहिने हाथ से रोगी की देह रगड़नी चाहिए. एक बार में देह का सिर्फ एक छोटा अंश इस तरह रगड़-रगड़कर गरम कर लेना चाहिए. बाद में उस अंग को ढंकार दूसरे अंग को रगड़ना चाहिए. देह की गरम हालत में यह घर्षण स्नान देना चाहिए. घर्षण देते समय समूचे बदन को एक चादर से ढंक कररखना चाहिए.

गरम ठंडा सेंक

गरम ठन्डे सेंक के लिए पहले छाती को गरम पानी में भिगोये, फिर निचोड़े हुए तौलिये से 3 मिनट सेंकना चाहिए. उसके बाद गरम पानी में भीगे तौलिये को हटाकर ठन्डे पानी में भीगा और निचोड़ा हुआ तौलिया उस स्थान पर एक मिनट तक रखना चाहिए. तीन से पांच बार तक यह क्रिया करनी चाहिए. अंतिम बार ठंडा तौलिया न रख कर छाती की गीली पट्टी बांधनी चाहिए. इस प्रकार बवासीर का प्राकृतिक इलाज bawasir natural treatment किया जा सकता हैं.

घर्षण कटी स्नान

कुर्सीनुमा नहाने के टब में ठंडा पानी इतना भरना चाहिए की उसमें नहाने के लिए बैठने पर पानी दोनों टांगों और नाभि तक पहुंच जाए. बाकी सब बदन सूखा रहे. जोड़े में नाभि और टांगों के ऊपर के हिस्से को कपडे से ढंकर रखा जा सकता हैं. अब खरददर एक खुरदरा छोटा तौलिया बाए हाथ में लेकर उससे पानी में डूबे पेडू (pelvic region) को दाएं हाथ से बायीं और और बाएं हाथ से दायीं और धीरे-धीरे, पर जल्दी-जल्दी मलना चाहिए. यह स्नान 10 से 20 मिनट तक किया जा सकता हैं. इसे एक दो मिनट से शुरू करना चाहिए और रोज एक-एक मिनट बढ़ाकर आवश्यक समय तक पहुंचना चाहिए.

श्वास की साधारण कसरत

खुली जगह में बैठकर, खड़े होकर या टहलते हुए धीरे-धीरे श्वास लेते हुए फेंफड़ो को हवा से भरना चाहिए. फिर बहुत धीरे-धीरे भरना चाहिए. उस सांस को निकाल देना चाहिए. इस क्रिया को कई बार करना चाहिए.

गीली मिटटी का उपयोग

गीली मिटटी को कूट पीसकर छलनी से छान लें, फिर उसमें ठंडा पानी मिलाकर किसी काठ के डंडे से गूंथकर आटे की तरह बना लेना चाहिए. अब 10-12 इंच लम्बा और 6-7 इंच चौड़ा एक मोटा कपडा लेकर उस पर सेर ढेर मिटटी को आधी इंच की मोटाई में फैलाना चाहिए और उसे उठाकर मिटटी की तरफ से पेडू पर रखकर, उसपर सूखा ऊनि कपडा लपेट देना चाहिए.

इस तरह मिटटी त्वचा को छूती रहेगी और थोड़ी देर में गरम हो जायेगी. 20-30 मिनट तक यह पट्टी लगानी चाहिए. उसके बाद इसे हटाकर पेडू (Pelvis region) को गीले कपडे से पोंछकर साफ़ कर देना चाहिए और उस स्थान को हाथ की हथेलियों से गरम कर देना चाहिए. यह मिटटी का बवासीर के लिए प्राकृतिक सरल घरेलु उपचार हैं, इन प्राकृतिक घरेलु उपाय से कोई नुकसान नहीं होता.

उपवास (Fasting in Piles Bawasir)

उपवास पानी के सिवा कुछ नहीं लेना चाहिए, पानी में थोड़ा सा कागजी नीबू का रस मिला लेना चाहिए. इसके साथ ही आप फलों के रस का सेवन भी कर सकते हैं. यह बवासीर का प्राकृतिक इलाज होगा best ever piles natural treatment in Hindi में. इसके साथ ही उपवास के दिनों में दोनों वक्त सेर डेढ़ सेर गरम पानी का एनिमा भी लेना चाहिए. ऐसा करने से पेट पूरी तरह से साफ़ और स्वच्छ हो जाएगा.

अगर तीन दिन उपवास किया जाय तो चौथे दिन केवल फल या तरकारियों का रस, पांचवे दिन केवल फल और छटे दिन सबेरे शाम फल और दोपहर में थोड़ी रोटी और तरकारी लेना चाहिए. इसके बाद साधारण भोजन पर आ जाना चाहिए.

पांवों का गरम स्नान (Hot Bath For Legs)

रोगी के सिर को पहले ठन्डे पानी से धोकर, उसपर गिला तौलिया लपेट देना चाहिए. उसके बाद उसको नंगे बदन किसी बंद कमरे में एक कुर्सी पर इस तरह बैठना चाहिए की उसके दोनों पांव सामने रखे हुए छोड़े पेंदे की छोटी बाल्टी में रहे. बाल्टी में 7-9 इंच गहरा पानी भरा हो. बाल्टी में दोनों पांव रखने से पानी घुटने के थोड़ा ऊपर तक आ जायेगा.

बाल्टी के जल का तापमान पहले 102 डिग्री फारेनहाइट रखना चाहिए, लेकिन उसमें से क्रमश: पानी निकाल निकालकर और उसकी जगह अधिक से अधिक गरम पानी डालकर उसके तामपान को 110 डिग्री 114 डिग्री तक ले जाना चाहिए.

स्नान के लिए जितना गरम पानी धीरे-धीरे लिया जायेगा, उतना ही अधिक लाभ होगा. यह गरम स्नान 4 से 30 मिनट तक लिया जा सकता हैं. गर्मियों में इस स्नान से 14 से 24 मिनट में खूब पसीना आ जाता हैं. जड़ों में उतना पसीना लाने के लिए कुछ अधिक समय लग सकता हैं.

स्नान की समाप्ति पर पांवों को गरम जल से निकालकर आधे मिनट से एक मिनट तक ठन्डे पानी में रखना चाहिए. फिर उन्हें भीगे तौलिये से अच्छी तरह पोंछ देना चाहिए. इसके बाद 10-15 मिनट में खूब पसीना आ जाता हैं. जाड़ों में उतना पसीना लाने के लिए कुछ अधिक समय लग सकता हैं.

जब इस स्नान से पसीना लाना अभीष्ट हो तो रोगी के शरीर को बाल्टी सहित कम्बल से पूरी तरह ढंक देनी चाहिए. सिर पर रखे ठन्डे तौलिये को बिच-बिच में ठन्डे पानी से तर करते रहना चाहिए या भीगे तौलिये को ही बदलते रहने चाहिए. इस स्नान के शुरू में थोड़ा सा गरम पानी पीना चाहिए और बिच-बीच में भी थोड़ा-थोड़ा गरम पानी पीते रहना चाहिए. शरीर पर पसीना आने पर स्नान के बाद उसे भीगे कपडे से पोंछ देना चाहिए या साधारण स्नान कर लेना चाहिए.

उम्मीद हैं दोस्तों आपको बवासीर का प्राकृतिक इलाज व उपचार के बारे में पढ़कर अच्छा लगा हो, यह piles natural treatment at home in Hindi को ढूंढने वाले व्यक्तियों के लिए विशेषकर दी गई थी. यह सभी काफी सरल विधियां हैं, अगर फिर भी आपको इन स्नान के बारे में कुछ समझ नहीं आया हो तो अपने नजदीकी बुजुर्गों व उन लोगों से इस बारे में पूछ सकते हैं जिनको आयुर्वेदा के बारे में अच्छी जानकारी हो. ऐसा करे से आपको सटीक जानकी प्राप्त हो जाएगी. इसके अलावा आप Comment के माध्यम से हमसे भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

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