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बुखार में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं – Fever Diet Tips

Healthy foods fever diet plan chart बुखार मानव के लिए सबसे आम रोग है, जो की हर एक व्यक्ति को कभी भी किसी भी मौसम में हो सकता हैं. इससे बचने के लिए बहुत से आसान उपाय होते हैं, जिनको अपनाकर आम आदमी ऐसे संक्रमण रोग से बच सकता हैं. बुखार भी संक्रमण के वजह से ही होता हैं.

Best Fever Diet Plan Kya Na Khaye Or Kya Khaye Hindi

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आज हम यहां आपको बुखार में क्या खाये और क्या न खाये इस विषय में सम्पूर्ण जानकारी देंगे. क्योंकि एक सही डाइट चार्ट प्लान (सही खानपान) से बड़े से बड़े रोग को भी मात दी जा सकती हैं. इसलिए हम यहां बुखार में कौन से फल सब्जियां, फल का रस, रोटी, सूप आदि बुखार में क्या खाना चाहिए इन हिंदी में और क्या नहीं खाना चाहिए इस विषय में गहराई से समझाते हुए आपको उपयोगी सलाह देंगे.

हमने सभी तरह की बीमारी में diet chart plan के महत्व के बारे में कई बार बताया हैं की “हर एक रोग में एक सही खान पान बहुत महत्व रखता हैं, इसके कई फायदे होते हैं. साथ ही इससे शरीर बीमारी हालात में भी अच्छा बना रहता हैं ज्यादा कमजोरी महसूस नहीं होती.

बुखार में क्यों खाये सही भोजन

बुखार में हमारे शरीर की पाचन प्रणाली बिगड़ जाती हैं, वह ठीक से काम नहीं कर पाती और अगर ऐसी स्थिति में हम ऐसा खाना खाये जो की भारी हो, जो की पाचन में समय लेता हो, तो ऐसे भोजन को पचाने में पाचन प्रणाली को ज्यादा कार्य करना पड़ता हैं वह भी बीमारी अवस्था में.

जरा सोचिये जब आप बीमार होते हैं तो आप भी शारीरिक काम नहीं कर पाते. बीमारी हालत में जरा सा काम करने पर भी भारी थकान महसूस होने लगती हैं. ठीक ऐसा ही हमारी पाचन प्रणाली के साथ होता हैं, जिससे आपके शरीर को ज्यादा नुकसान पहुंचता हैं, ज्यादा कमजोरी आने लगती हैं.

जानिए बुखार में क्या खाना चाहिए इन हिंदी में सही खानपान

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बहुत से ऐसे लोग आज भी जिन्दा हैं, जो की बुखार के समय ढेर सारा भोजन करते हैं और उन्हें कुछ नहीं होता, इसके पीछे शारीरिक क्षमता होती हैं. उनका शरीर होता ही ऐसा ही, जो की इन सब को एडजस्ट कर लेता हैं. पर आज कल ऐसा शरीर सभी का नहीं होता. इसलिए आप इसे Try न करे.

रखे रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत नहीं होगा कभी बुखार

अगर आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हैं तो आपको प्रकृति में हो रही छोटी से छोटी हलचल भी प्रभावित करेगी. आप जरा से मौसम के परिवर्तन होने पर बीमार पड़ जाएंगे. और अगर आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी तो फिर बुरे से बुरे हालात में भी आपको बुखार नहीं आ सकता हैं. यानी बुखार के संक्रमण आप पर हावी नही हो सकेंगे.

बुखार की डाइट – इसलिए अगर आप बुखार से हमेशा के लिए छुटकारा पाना चाहते हैं तो अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाये. एक सही खान पान भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में अहम् भूमिका निभाता हैं. इसके साथ ही बताये जा रहे बुखार में क्या खाये और क्या नहीं खाना चाहिए इस डाइट पर ध्यान दें (viral fever).

पानी ज्यादा पिए (बैक्टीरिया मर जायेंगे)

यह हम सभी जानते हैं की हमारा शरीर पानी से ही बना है और इसे पानी की बहुत जरुरत होती हैं, पानी की शरीर में कमी होने पर बहुत से रोग बैक्टीरिया शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं. खासकर बीमारी हालत में तो पानी की कमी होना ही नहीं चाहिए, हर एक रोग में एक दो घंटे के भीतर एक दो ग्लास पानी पीते रहना चाहिए. ऐसा करने से शरीर में तरलता बनी रहती हैं, और डिहाइड्रेशन का खतरा भी नहीं रहता.

बुखार के समय हमे ज्यादा पानी इसलिए पीना चाहिए क्योंकि बीमारी हालत में कम पानी पिने से बैक्टीरिया ओर हावी हो जाते हैं, वह शरीर और ज्यादा फेलने लगते हैं. ज्यादा पानी पिने से यह बैक्टीरिया शरीर में टिक नहीं पाते. शरीर की क्रिया इन्हें मूत्र द्वार के जरिये शरीर से बाहर निकाल देती हैं. जिससे इनकी जनसंख्या में कमी होने लगती हैं और बुखार जल्दी ठीक होने की संभावना ज्यादा हो जाती हैं. इसलिए हमेशा पानी ज्यादा पीना चाहिए.

चाय पीना बंद कर दें बुखार में क्या नहीं खाना चाहिए

चाय में कैफीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती हैं, और कैफीन को जहर माना जाता हैं. यह शरीर को कई रूप से नुकसान देता हैं. खासकर तो बीमारी हालत में रोगी को चाय का सेवन तो बिलकुल भी नहीं करना चाहिए. क्योंकि यह आपकी दवाई के असर को भी कम कर सकती हैं.

इसके जगह आप अदरक की चाय, तुलसी की चाय, काली चाय आदि इन चाय का सेवन कर सकते हैं. इनमे और सादी चाय में बस थोड़ा स्वाद का फर्क होता हैं, बाकी यह रहती एक जैसी ही हैं. दूसरी बात यह सादाहरण चाय के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद होती हैं. बुखार में होने वाली सर्दी जुकाम और खांसी को दूर करने में भी बहुत असरकारी होती हैं.

इसलिए आपको बुखार में और सर्दी के मौसम में इस तरह की चाय का उपयोग करते रहना चाहिए. यह आपके शरीर में सर्दी जुकाम के बैक्टीरिया को पनपने ही नहीं देंगी हैं. इसके आलावा आप अगर सर्दी से ज्यादा परेशान हैं तो रोजाना सुबह खाली पेट तीन तुलसी के पत्ते एक गिलास पानी के साथ खाये फिर आपको जिंदगी भर कभी भी सर्दी और बुखार नहीं होगा.

बुखार में कोल्ड ड्रिंक्स न पिए खाये

जिस तरह हमने चाय के नुकसान के बारे में बताया ठीक उतना ही नुकसान कोल्ड्रिंक्स पिने से भी होता हैं. यह शरीर की आंतड़ियो को सड़ा देती हैं. और दूसरा नुकसान यह ठंडी होती हैं, जिससे बुखार के समय शरीर में ठन्डे गरम का फर्क पढ़ सकता हैं. इससे आपका बुखार टाइफाइड में भी बदल सकता हैं.

कोल्ड्रिंक्स में कई तरह के बैक्टीरिया होते हैं, और यह हम सब को पता हैं की बीमारी हालत में शरीर बहुत नाजुक हो जाता हैं, तो ऐसे हालात में कोल्ड्रिंक्स के यह बैक्टीरिया शरीर पर हमला कर सकते हैं. जिससे शरीर में कई तरह की नई बीमारियां पैदा हो सकती हैं. इसलिए कोल्ड्रिंक्स न पिए इसके बदले आप बुखार में फलो का रस (Fruits Juice) पि सकते हैं इन हिंदी बुखार में क्या नहीं खाना चाहिए.

अगर बुखार में आपको दस्त भी हो रहे हैं तो एक आधा कप चाय में पानी डालकर उसे पुरे कप जितना पानी से भर कर पिए. यह आसान घरेलु उपाय दस्त में बहुत फायदेमंद होगा. इसके साथ ही दलीया, दही, खिचड़ी, भाप में पकाई हुई सब्जी आदि का सेवन करना शुरू कर दें.

बुखार में पका भोजन खाये इन हिंदी

बुखार में पका हुआ भोजन खाना चाहिए, यह स्वादिष्ठ और संक्रमण रहित होता हैं. भोजन को ठीक से पकाने पर उसमे मौजूद सारे संक्रमण बैक्टीरिया मर जाते हैं. जिससे शरीर संक्रमण का कोई खतरा नहीं रहता. ज्यादा से ज्यादा हरे पत्तेदार सब्जियां खाये, मूंग की दाल खाये, दलिया खाये, सब्जियों का सूप पिए और बुखार में मूंग की खिचड़ी भी खाना चाहिए.

Foods to avoid बुखार में क्या नहीं खाना चाहिए – जैसा की हमने ऊपर बताया एक तो सादहरण चाय न पिए, कोल्ड्रिंक्स न पिए, सिगरेट्स भी बंद कर दें, मांसाहारी भोजन भी नहीं खाना चाहिए और भारी भोजन करने से बचे. भूख से कम खाना खाये, भारी भोजन से हमारा मतलब है की वह भोजन जो की पचाने में समय लेता हो. और ऐसे भोजन में सिर्फ मूंग की खिचड़ी, सब्जियों का सूप, फलों का रस आदि आते हैं, इसे हल्का भोजन भी कहा जाता हैं.

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बुखार में तरल पदार्थ का सेवन ज्यादा करे. इसमें फलों का रस पीना सबसे अच्छा है.

Foods To Avoid in Fever in Hindi

इन चीजों को बुखार में बिलकुल भी न खाये. दूध से बने पदार्थ जैसे दूध का क्रीम आदि इन से बचे, इस जगह आप दूध पि सकते हैं लेकिन इससे बने हुए पदार्थ न ले. दूसरी बात मांसाहारी भोजन से बुखार में परहेज करे, लाल मांस, मछली, मुर्गी, बकरे का मांस आदि नॉन वेजीटेरियन भोजन बुखार में नहीं खाना चाहिए.

क्योंकि इनमे कोलेस्ट्रॉल ज्यादा मात्रा में पाया जाता हैं और यह पचाने में जटिल होते हैं, इनको पचाने में पाचन प्रणाली को बहुत क्रिया करनी पड़ती हैं, यह बहुत देर से पचते हैं. इसलिए मांसाहारी भोजन न खाये. चाय, कॉफ़ी, कोल्ड्रिंक्स भी Fever में Avoid करे in hindi. तेल से बनी तली हुई चीजें से भी बचे.

बुखार के समय आराम करे, बाहर बाजार में घूमने फिरने से बचे, क्योंकि अभी हमने आपको बताया हैं की बीमारी हालात में हमारा शरीर बहुत नाजुक होता हैं. और ऐसी नाजुक हालत में बहार का वातावरण हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाता हैं. तरह तरह के संक्रमण जो की हवा में बह रहे होते हैं वह रोगी के शरीर में प्रवेश कर सकते हैं.

Fever Patients के लिए Breakfast

Breakfast में आप फलों का सेवन करे. क्योंकि फलों में विटामिन C ज्यादा मात्रा में होता हैं और यह Vitamin रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करता हैं. इसके साथ ही आप ताज़ा गरम दूध भी पि सकते हैं. दूध में आप केसर और एक चम्मच शहद मिलाये, इसे अच्छे से मिक्स कर के पिए, बुखार में यह बहुत फायदेमंड रहेगा, कमजोरी नहीं आने देगा. ब्रेकफास्ट में क्या न लें – इस वक्त आप हल्का भोजन ही करे, और भूख से आधा ही खाये.

बुखार के समय लंच में क्या खाना खाये

Lunch में ऐसे पदार्थ खाये जिनमे कार्बोहाइड्रेट्स मिलता हो. आप इसमें हरी सब्जियां, सब्जियों का सूप, आदि खा सकते हैं. शरीर की कमजोरी दूर करने के लिए हमे प्रोटीन से भरा भोजन भी करना चाहिए, और इसके लिए अंडे एक बेहतरीन उपाय हैं. यह पाचन में भी हलके ही होते हैं, बुखार में उबले हुए अंडो का ही सेवन करे. इसके साथ ही उबली हुई सब्जी व रोटी खा सकते हैं.

Fever Dinner में क्या खाये

Dinner में पेट भरकर नहीं खाना चाहिए, फिर चाहे बुखार हो या सामान्य अवस्था, रात के समय हमेशा कम भोजन करना चाहिए. क्योंकि रात के समय भोजन पचाने में समस्या होती है. हमने जो लंच में बताया हैं वही भोजन आप डिनर में भी ले सकते हैं. इसके साथ ही फलों का रस व सादे फलों, पपीता का सेवन कर सकते हैं.

वैज्ञानिकों ने रिसर्च में यह जाना हैं की बुखार में Chicken stew का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता हैं. यह शरीर को जरुरत अनुसार ताकत देता हैं, इसके साथ ही यह पचने में भी ज्यादा समय नहीं लगाता. यह बुखार से शरीर पर हुए नुकसान से जल्दी उभरने का एक अच्छा स्त्रोत हैं.

संक्रमित भोजन खाने से बचे

बुखार एक संक्रमण होता हैं, इसका होना यह खबर देता हैं की आपका शरीर भीतर किसी बैक्टीरिया से लड़ाई लड़ रहा हैं. तो आपको यह बात अच्छे से समझ लेना है की ऐसी चीजों से बचे जो की संक्रमण की शिकार हो. फलों को भी अच्छे से धोकर ही खाये, ज्यादा समय से कटे हुए फलों का सेवन न करे, और ना ही किसी फल को काट कर आधा छोड़ दें. क्योंकि कटे हुए फल पर उसके कटे हुए हिस्से पर ढेर सारे बैक्टीरिया आकर बैठ जाते हैं. और अगर ऐसे में कटे फल का सेवन करेंगे तो नुकसान होगा.

हमने आपको लेख की शुरुआत में बुखार में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं इस सेक्शन में पानी के बारे में जो बताया हैं उसमे यह सलाह भी याद रखे. इस बात का ख़ास ध्यान रखे की जो पानी आप पि रहे हो वह बिलकुल साफ़ हो, क्योंकि आज के समय में ज्यादातर बीमारियां पानी के संक्रमण से भी होने लगी हैं. अगर आपके क्षेत्र में पानी गन्दा मिलता हो तो इसे फीवर में उबालकर पिए.

Indian Diet & Foods For Fever Patients

बुखार में बिना घी व तैल की रोटियां खाये, फायदेमंद होगी.

चावल का सेवन करे, यह स्वादिष्ट भी होते हैं और इनको पचने में ज्यादा समय भी नहीं लगता.

 

सूप पिए, आप किसी भी तरह का सूप पि सकते हैं यह fever diet plan के लिए अच्छा स्त्रोत हैं.

खिचड़ी भी पचाने में बहुत आसान होती हैं, इसमें कैलोरीज भी अधिक होती हैं. इसका सेवन जरूर करे.

आलू को उबालकर खाये, जब आपका मन कुछ अलग खाने का हो तो यह जरूर आजमाए.

रेड और वाइट सेल्स बुखार के समय कम हो जाते हैं जिससे शरीर को बहुत नुकसान होता हैं. इसकी भरपाई के लिए आप सेब खाये. क्योंकि सेब में रेड वाइट सेल्स की वृद्धि करने की क्षमता होती हैं.

फलों के रस का सेवन करे, यह डिहाइड्रेशन से भी बचाएंगे और मुंह के स्वाद को भी ठीक करेंगे.

उबले हुए अंडे खाये, बुखार में आसानी से प्रोटीन पाने के लिए यह बहुत अच्छा स्त्रोत हैं.

बुखार में Raw fruits (कच्चे फल) ज्यादा खाना चाहिए.

Important Fever Diet Tips – क्या करे क्या न करे

(1). बुखार उतरने पर रोगी कमजोर हो जाता हैं, इसलिए उसे ठंडी हवा से बचाते हुए बंद कमरे में गीले तोलिये से उसका शरीर पोंछ देना चाहिए. ऐसा आपको रोगी को नहलाने के बाद व रोगी को पसीना आने पर जरूर करना चाहिए, ऐसे में रोगी को हवा लगना बेहद खतरनाक हो सकता हैं. क्योंकि ऐसे समय पर रोगी का शरीर काफी कमजोर नाजुक सा रहता हैं.

(2). बुखार आने के बाद होंठों के पकने व फट जाने पर जीरे को पानी के साथ महीन पीसकर 4-4 घंटे के अंतराल से होंठों पर लेप करने से ये कष्ट दूर हो जाते हैं.

(3). बुखार से पीड़ित रोगी को अगर दूध हजम न होता हो, तो दूध को उबालते समय सौंफ के कुछ दाने डालकर या 1-2 छोटी पीपर डालकर उबालने से दूध हल्का और सुपाच्य हो जाता हैं. इसके अलावा पीपर का दूध पुराने बुखार को भी दूर करता हैं.

(4). वात और कफ बुखार में उबालकर ठंडा किया हुआ पानी रोगी को पिलाना चाहिए. औटाया हुआ पानी वात और कफ बुखार को ख़त्म करता हैं, जो पानी औटाते औटाते धीरे-धीरे झाग रहित और निर्मल हो जाए तथा आधा बाकी रह जाए, उसे ही औटा हुआ अथवा उष्णोदक पानी कहा जाता हैं. आयुर्वेदे शास्त्र के मुताबिक-

  • एक किलो का 250 ग्राम पका हुआ गर्म पानी कफ बुखार का नाश करता हैं
  • एक किलो 750 ग्राम पका हुआ गर्म पानी पित्त बुखार का नाश करता हैं
  • 1-2 बार उबाला हुआ पका पानी रात में पिने से कफ वात और अजीर्ण नाशक होता हैं
  • सभी प्रकार के बुखार में बेदाना मीठा अनार निर्भयतापूर्वक दिया जा सकता हैं. इससे बुखार के समय बार-बार प्यास लगना शांत हो जाती हैं.

(5). सभी तरह के बुखार की शुरुआत में रोगी को अन्न न देकर या केवल तरल पदार्थ अथवा फल देना उचित हैं. जैसे दूध, चाय, यथासम्भव तुलसी चाय, गुरुकुल, कांगड़ी हरिद्वार की चाय, मौसमी फल और उसका रस बिना बर्फ के मिलाये ही पीना लाभदायक होता हैं. नारियल पानी, नीबू पानी, चीकू, पपीता, आलूबुखारा, साबूदाना आदि यह सभी अत्यंत लाभकारी होते हैं और सभी तरह के बुखार में खाये जा सकते हैं.

(6). निमोनियां के बुखार में 250 ग्राम पानी में 1 लौंग डालकर 10 मिनट तक उबाले. इसके बाद 60 ग्राम यह पानी रोगी को दिन में 2-3 बार देना परम लाभप्रद हैं.

(7). आयुर्वेदीय के मुताबिक मैदे से बनी खाद्य वस्तुए जैसे बिस्कुट, डबलरोटी आदि बुखार की स्थिति में रोगी को नहीं दी जानी चाहिए. इनकी जगह पर मूंग की दाल, मूंग की दाल का पानी, साबूदाना-दूध दिया जा सकता हैं और पटोलिया आधा कप की मात्रा में देना चाहिए. पटोलिया बनाने की विधि –

(8). थोड़े से गेहूं के आटे में कुछ बूंदे देसी घी की डालकर हलकी आंच पर गुलाबी-गुलाबी भूनकर उसमे इतनी मात्रा में गर्म पानी मिलाये की पतला तरल घोल सा बन जाए. भुने आटे में गर्म पानी मिलाते समय किसी करछी से अच्छी तरह हिलाते रहना चाहिए, ताकि आटे की डालियां न रहने पाए और घोल गाढ़ा व एकसार बन जाए. इसके बाद इसमें अपनी जरूरत के मुताबिक दूध-शक्कर या अकेली शक्कर अथवा नमक मिलाकर लें यही सुपाच्य पोटलिया हैं.

(9). बुखार कम हो जाने पर या फिर उतर जाने पर खिचड़ी, गेहूं की डालियां, अंगूर, सेब आदि सुपाच्य आहार रोगी को देना चाहिए. बुखार के दौरान रोगी को उबालकर ठंडा किया हुआ थोड़ी-थोड़ी मात्रा में घूंट-घूंट करके खूब पिलाना चाहिए.

(10). बुखार पूरी तरह उतर जाने के बाद धीरे-धीरे तरल चीजों के बदले पर ठोस आहार जैसे एक आध पतला फुल्का, टिंडा, परवल, तोरई, घीया, चौलाई, बथुआ, मेथी आदि कम मसाले वाले सब्जियां मूंग की दाल मूंग की बड़ियां मंगोड़ी की सब्जी, मसूर की दाल, टमाटर-प्याज का सलाद आदि देना चाहिए, लेकिन ध्यान रहे की बुखार के रोगी को कोई भी खाद्य पदार्थ भर पेट नहीं खिलाना चाहिए, बल्कि थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई बार में खिलाना चाहिए.

(11). बुखार में रोगी को पोदीना के 10 पत्ते और 10 नग मुनक्का 200 ग्राम पानी में शाम को भिगो देने के बाद सुबह के समय मसल कर व छानकर पिलाने से उदर विकार, अपच व मंदाग्नि में लाभ होता हैं.

(12). बुखार से पीड़ित रोगी को भूख न लगने पर मुंह का स्वाद सुधारने के लिए भोजन से 10-15 मिनट पहले छिले हुए अदरक की कतरनों पर 1-2 ग्राम नमक लगाकर खिलाना चाहिए या फिर टमाटर काटकर सेंधा नमक लगाकर खाये इसके अलावा मुनक्का बिना बीज के 4-5 नग पीस मसलकर जरा सा काला नमक या सेंधा नमक मिलाकर खिलाये. नीबू के आधे भाग पर कालीमिर्च या काला नमक लगाकर हलकी आंच पर तवे पर रखकर गर्म करे. जब नीबू का रस खद-बद करने लगे, तब उसे तवे से उतारकर चूसने से भी मुंह का स्वाद सुधरता हैं.

(13). बुखार के बाद की दुर्बलता को दूर करने के लिए दूध में 4-5 नग खजूर उबालकर या फिर शहद 1-2 चम्मच की मात्रा में दिन में 2 बार देना लाभदायक होता हैं. बच्चों को खसरा, चेचक आदि के बाद की कमजोरी को मिटाने के लिए 1 छुहारा दूध में उबालकर दिन में 2 बार पिलाना लाभकारी होता हैं.

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16 Comments

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