f

कब्ज की आयुर्वेदिक दवा – Effective Constipation Medicines List

Ad Blocker Detected

Our website is made possible by displaying online advertisements to our visitors. Please consider supporting us by disabling your ad blocker.

Constipation medicines – सभी चिकित्सा पद्धतियों में कब्ज को दूसरे रोगों की उत्पत्ति का कारण माना जाता हैं. इसे आयुर्वेदा में रोगो की जननी भी कहते हैं. आये दिन पेट व शरीर के आदि जो भी रोग होते हैं उनके पीछे कब्ज ही होता हैं. किसी भी स्त्री पुरुष में कब्ज होने के बाद ही दूसरे रोग विकार दिखाई देते हैं. इसीलिए अधिकांश चिकित्सक किसी भयंकर रोग को नष्ट करने के लिए पहले कब्ज को नष्ट करते हैं. प्राकृतिक चिकित्सा में कब्ज को पूरी तरह नष्ट करने से दूसरे रोग स्वयं नष्ट हो जाते हैं.

kabj ki dawa, constipation medicine in hindi

क्यों और कैसे होती हैं कब्ज : प्रकृति विरुद्ध आहार विहार करने से कब्ज की विकृति होती हैं. कुछ भी उल्टा सीधा व जो हमारी सेहत के लिए ठीक नहीं होता, ऐसे भोजन को खाने से कब्ज रोग हो जाता हैं. ऐसे में अक्सर कब्ज के रोगी को कब्ज की दवा, देसी आयुर्वेदिक व पतंजलि के चूर्ण आदि लेने पढ़ते हैं.

अधिक खाने और शारीरिक श्रम नहीं कर पाने की प्रवत्ति किसी भी स्त्री-पुरुष के उदर में कब्ज की उत्पत्ति करती हैं. कुछ स्त्री-पुरुष जल कम मात्रा में पीते हैं. ऐसी स्थिति में चाय, कॉफ़ी और तेल मिर्च से बने अम्लीय व्यंजन अधिक सेवन करते हैं तो शरीर में जल की कमी के कारण शुष्कता बढ़ने से कब्ज की उत्पत्ति होने लगती हैं. इसीलिए कब्ज से बचाव के लिए शरीर को तरल बनाये रखने की सलाह दी जाती है.

पेट में कब्ज़ियत को दूर करने के लिए कब्ज की दवा देसी इन हिंदी में

लक्षण : आंतों में कब्ज के कारण मल रुके रहने से शरीर के दूषित तत्व अनेक रोग-विकारों को उत्पन्न करते हैं. रोगी को भूख न लगने, उदरशूल, अनिद्रा, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, तीव्र धड़कन, मुंह से दुर्गन्ध और कभी-कभी ज्वर के लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं. अधिक समय तक कब्ज को नष्ट न किया जाए तो आंत्रों की वृद्धि (हाइपर ऑफ़ इंटेंशन), आंत्रों में जख्म तक हो सकते हैं. इसके साथ ही अर्श (बवासीर), वायुविकार (गैस) की विकृति होने लगती हैं.

चिकित्सा : कब्ज होने पर क्या करे

कब्ज होने पर रोगी कोई विरेचक जुलाब औषधि लेकर पेट से मल को निष्कासित करते हैं. लेकिन एक दो दस्त हो जाने से कब्ज पूरी तरह नष्ट नहीं हो पाती. कब्ज को पूरी तरह नष्ट करने के लिए रोगी को अपने भोजन में जल अंश वाले फल-सब्जियां का सेवन अधिक करने के साथ ही शारीरिक श्रम या प्रात:भ्रमण करना भी आवश्यक है. अब हम यहां पर कब्ज को नष्ट करने के लिए गुणकारी होमेओपेथी औषधियों की बारे में बता रहे हैं जो की पेट में क़ब्ज़ की दवा के रूप में काम करेंगी.

Constipation Medicines List in Hindi Indian & Homeopathic

ओपियम दवा – Opium Medicine

अगर आपको लम्बे समय से कब्ज बनी हुई हो, मल निष्कासन लेटरिंग करने में कठिनाई आ रही हो, मल गट्ठा व गोल ठोस टुकड़ों में निकल रहा हो, मल काला शुष्क, ज्यादा बदबूदार, मल-द्वार में दर्द होना इसके साथ ही उदरशूल और वमन की विकृति होना, भूख नहीं लगना, सर में दर्द होना आदि इन कब्ज के लक्षणों के होने पर आप यह दवा मेडिसिन ले सकते हैं. यह इन सभी लक्षणों में बहुत असरकारी साबित होती हैं.

नक्स वोमिका – Nux Vomica

पाचनक्रिया की विकृति से कब्ज होने पर, आंखों के ऊपरी हिस्सों में दर्द होना, चक्कर आना, कब्ज की वजह से मल नहीं निकलना (लेटरिंग नहीं आना), ज्यादा जोर लगाने पर भी थोड़ा सा मल निकलना, मलांश में सिकुड़न, बवासीर होने पर, स्वांस फूलना, मुंह में छाले होना, बेचैनी सी महसूस होना, जरुरत से ज्यादा भोजन करना और शराब पिने की वजह से होने वाली कब्ज आदि इन सभी में यह पेट में क़ब्ज़ की दवा बहुत असरकारी व गुणकारी होती हैं.

“कब्ज की बीमारी का कोई भी परमानेंट इलाज नहीं होता, यानी ऐसी कोई दवा या चूर्ण नहीं होते जिनको सिर्फ एक बार लेने से कब्ज हमेशा के लिए ख़त्म हो जाती हो. इसके लिए रोगी को रोजाना दवा या चूर्ण लेना पड़ता हैं. लेकिन ऐसा भी एक देसी उपाय हैं जो की योग गुरु बाबा रामदेव ने बताया यह उपाय कब्ज का परमानेंट इलाज हैं. इसको कोई भी व्यक्ति, सभी उम्र के कर सकते हैं. सिर्फ 3-4 दिन तक इसका प्रयोग करके देखें हमेशा के लिए पुरानी से पुरानी क़ब्ज़ दूर हो जायेगी. बाबा रामदेव के इसे देसी उपाय के बारे में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करे – Baba Ramdev Ka Desi Upay Gau Mutra

ब्रायोनिया – Bryonia Homeopathic Tablets

यह कब्ज के लिए ज्यादा उपयोग की जाने वाली दवाइयों में से एक हैं. पेट में जलन के साथ दर्द होना, यकृत में शोथ के लक्षण होना, ज्यादातर कब्ज होना, गहरी स्वांस लेने पर कठिनाई होना, खांसी होना, सर में दर्द होना, मल के साथ साथ रक्त का निकलना, ग्रीष्म ऋतू के मौसम में कब्ज की विकृति में ज्यादा परेशानी होना, सुबह पहली उठने पर उलटी जैसा मन होना आदि इन सभी बातों के होने पर आप इस आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक दवा का सेवन कर सकते हैं. यह इन सभी लक्षणों को मिटाने में बहुत गुणकारी होती हैं.

ऐलूमिना – Alumina Constipation Medicine

ज्यादा दिनों, लम्बे समय से कब्ज बने रहने पर, उदर में शूल होने पर, मुंह में से बदबू आना, मल ज्यादा शुष्क होना, सर में सुई की चुभन जैसा अनुभव होना, उलटी जैसा मन होना, सर में दर्द रहना, मल द्वार में खुजली चलना इसके साथ हलकी सी जलन भी होना, मलत्याग से काफी देर पहले उदरशूल होने पर इस दवा ऐलूमिना का सेवन करना चाहिए. यह दवा बच्चों की कब्ज के लिए बहुत असरकारी होती हैं. इसलिए आप इस कॉन्स्टिपेशन मेडिसिन को बच्चों को भी दे सकते हैं.

मैग्नेशिया म्यूर – Magnesia Muriatica

भूख कम लगने पर, कब्ज के साथ यकृत में दबाव के साथ दर्द होने पर, मुंह में गन्दा और सड़े अण्डों के जैसी बदबू जैसी डकारे आना, यकृत शोथ में उदर फूल होने पर, बच्चों को कब्ज होने पर, मल गांठदार आने पर, मलद्वार में से खून निकलने पर, महिलाओ में काले रंग का खून निकलने पर, पीठ व नितम्बो पर शूल होने पर इस आयुर्वेदिक औषधि का उपयोग किया जा सकता हैं बहुत लाभ देगी. यह भी बच्चों की कब्ज को मिटने के लिए उपयोग में लाइ जा सकती हैं. बहुत ही सरल उपचार है बच्चों की कब्ज के लिए.

क्या आप कब्ज का देसी दवाइयों व घरेलु आयुर्वेदिक दवाओं से इलाज करना चाहते हैं तो आपको यह हमारे द्वारा दिए गए यह घरेलु नुस्खे जरूर पढ़ना चाहिए. यह घरेलु नुस्खे देसी दवा हैं, इनका प्रयोग आप घर पर ही कर सकते हैं. इनके बारे में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करे – कब्ज के लिए 51 रामबाण नुस्खे Or क़ब्ज़ के लिए 30 सरल घरेलु नुस्खे

हइड्रैस्टिस – Hydrastis Canadensis

पाचन विकृति से कब्ज की उतपत्ति होने, शारीरिक निर्बलता होने, कटिवेदना, कब्ज के कारण सर में दर्द होने पर, भूख कम लगने पर, अमाशय में कभी ज्यादा तो कभी का दर्द होने पर, कब्ज में पीलिये जैसे लक्षण दिखाई देने पर, गैस की शिकायत होने पर, लेटरिंग करते समय मलद्वार में दर्द होना, व बवासीर में खून बहने पर इस औषधि का सेवन किया जा सकता हैं. यह बच्चों की कब्ज की दवा के रूप में भी ली जा सकती हैं.

लाइकोपोडियम Lycopodium For Constipation

कब्ज में यह बहुत गुणकारी औषधि होती हैं. यह पेट से सम्बंधित सभी पाचन तंत्रों के विकारों में लाभदायक होती हैं. शरीरी रूप से निर्बल, स्मरण शक्ति का क्षीण होना, पेट में अफारे की शिकायत होना, शोरगुल से परेशानी होना, चीजें खाने की इच्छा और रोटी से अरुचि होना, खट्टी-खट्टी डकारे आना, भोजन के बाद अमाशय में दबाव, पेट में वायु की गड़गड़गाहट होना, मल शुष्क होने पर, बवासीर होने और इसमें खून बहने पर, थोड़ा सा खाते ही पेट में वायु विकार अफारा होना, आदि इन सभी स्थितियों में यह दवा ली जा सकती हैं.

सल्फर कब्ज दवा – Sulphur

बहुत ज्यादा कब्ज होने पर, लेटरिंग जाने की इच्छा न होने पर, अर्श की उत्पत्ति होने पर, आंत्रों में तीव्र जलन और बेचैनी होने पर, कभी कब्ज तो कभी अतिसार होने पर, कब्ज में बहुत कम या न के बराबर भूख लगने पर या बहुत ज्यादा भूख लगने पर, दूध हजम नहीं होने पर, मीठा खाने की इच्छा होने पर, खट्टी डकारें आने पर, अर्श की उतपत्ति होने पर आदि इन सभी स्थितियों पर यह सल्फर औषधि/दवा बहुत ही गुणकारी होती हैं. कब्ज के लिए यह दवा बहुत फायदा देती हैं.

ग्रैफाइटस – Graphites

लम्बे समय से कब्ज होना, कब्ज के वजह से लेटरिंग जाने की इच्छा न होना, लम्बे समय से मलत्याग नहीं करना, गांठों के रूप में मल आना, लेटरिंग जाने में मलद्वार में जलन व दर्द होने पर, श्लेष्मा के धागे निकलने पर, मलद्वार में जख्म होने से पीड़ा होना, सुबह सोकर उठने के बाद सर में दर्द होना, उदर में भारीपन, गैस के कारण दर्द होने पर, उदर से दुर्गन्ध-युक्त गैस निकलने पर आदि इन सभी शिकायतों के होने पर ग्रैफाइटस नामक इस देसी दवा को कब्ज के लिए लिया जा सकता हैं. इन सभी लक्षणों में यह अति लाभदायक होती हैं.

कब्ज में त्रिफला चूर्ण बहुत लाभ देता हैं. इसकी कुछ ही दिनों की खुराक कब्ज से छुटकारा दिला देती हैं. साथ ही त्रिफला का सेवन करने से शरीर को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता, इसीलिए हम आपको एक सलाह देते हैं की इन दवाइयों को सेवन करने से पहले आपको त्रिफला चूर्ण का उपयोग जरूर करना चाहिए. त्रिफला को कब्ज में कैसे लेना चाहिए इस बारे में राजीव दीक्षित जी ने पूरी जानकारी बताई हैं. इसे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करे- Triphala Churna For Constipation.

नेट्रम म्योर देसी दवा

(अगर आपको कोई सी भी कॉन्स्टिपेशन मेडिसिन से लाभ नहीं हो रहा हो तो कॉन्स्टिपेशन की दवा में आप इस नेट्रम म्योर का सेवन कर सकते हैं). रोगी को मल त्याग करने की इच्छा न होने पर, भोजन करते समय ज्यादा पसीना आने पर, आंत्रों के निचे किसी वास्तु को दबाने का अनुभव होना, अफारे की विकृति और पेट में काटने के जैसी पीड़ा होने पर, लेटरिंग जाने के बाद मलद्वार में तेज दर्द होने पर, मलद्वार से खून निकलने पर इस औषधि का सेवन किया जा सकता हैं. अगर आपको कोई और औषधि कब्ज में लाभ न दे रही हो तो कब्ज की इस दवा का नेट्रम म्योर का सेवन जरूर करे.

Other Constipation Medicine & Tablets

यह जो हमने आपको कब्ज/कॉन्स्टिपेशन की दवाइयां बताई हैं, यह कब्ज के लिए अति उत्तम हैं. इसके साथ ही हम आपको कब्ज की और औषधियों के बारे में बता रहे हैं जो की निम्नलिखित हैं.

qabz ki dawa, qabz ki desi dawa

  1. टैनिक एसिड
  2. मैग्नीशिया
  3. वेराट्रम
  4. लेक-डेफ़लोरेटम
  5. कोनियम
  6. प्लैटिना
  7. प्लमबम
  8. सिकेलकोर
  9. आइरिस
  10. फशोरिक आदि यह भी कब्ज को दूर करने के लिए उपयोग में लाइ जा सकती हैं.

टिप्स : कब्ज में अधिकतर रोगी को मल निष्कासन में बड़ी तकलीफ होती हैं. ऐसे में रोगी का मल गट्ठेदार हो जाता हैं. इसके लिए आप इस आयुर्वेदिक घरेलु दवा का उपयोग करिये. यह एक एनिमा क्रिया हैं, इसके बारे में हमने पिछले लेखों में पूरी जानकारी दी हैं. यह enema क्रिया आपको थोड़ी अजीब लगेगी लेकिन यह कब्ज के रोगी के लिए रामबाण दवा की तरह काम करती हैं. कब्ज में जुडी मल की सारी समस्या को ख़त्म करती है. इसके बारे में जानने के लिए हमारे द्वारा कब्ज रोग पर लिखे गए पिछले लेख जरूर पड़ें.

क़ब्ज़ की आयुर्वेदिक दवा – इन दवाइयों को आप किसी भी होम्योपैथिक स्टोर्स, पतंजलि स्टोर्स, मेडिकल स्टोर्स से खरीद सकते हैं, खरीदते वक्त दुकानदार को अपनी परेशानी भी बताये और उससे यह भी पूछ ले की इस दवा को किस खुराक में लेना हैं, सुबह व शाम कितनी लें आदि.

कब्ज की दवा कॉन्स्टिपेशन मेडिसिन uses इन हिंदी स्पेशल homeopathic medicine tablets in hindi satisfied door kabza world wide.

इसके साथ ही कब्ज के रोगी को भोजन में गाजर, मूली, खीरा, प्याज, चुकंदर, टमाटर आदि का सलाद भी कब्ज के रोगी को खूब खाना चाहिए. और रोजाना सुबह खाली पेट एक गिलास पानी में एक या दो निम्बू को डालकर पिने से भी कब्ज नहीं होती. ऐसा कब्ज के रोगी को रोजाना करना चाहिए.

loading...

Leave a Reply

error: Please Don\'t Try To Copy & Paste. Just Click On Share Buttons To Share This.