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Indigestion Dyspepsia Treatment 51 Remedies (बदहजमी)

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Indigestion treatment in Hindi पढ़िए अजीर्ण, अपच अपचन, बदहजमी के आयुर्वेदिक घरेलु उपाय और नुस्खे के बारे में , इनके जरिये आप कुछ सप्ताह में ही घर पर अपचन अजीर्ण का इलाज इन हिंदी में कर सकते हैं. यह सबसे आसान और रामबाण नुस्खे हैं जो बाबा रामदेव, राजीव दीक्षित व अन्य आयुर्वदा के द्वारा बताये गए हैं. इसके साथ ही हम अपचन अजीर्ण बदहजमी के लक्षण व कारण के बारे में भी जानेंगे. क्योंकि हमारी समझ यह हैं की अगर हम किसी बीमारी के बारे में अच्छे से जान ले की यह क्यों और कैसे होती हैं तो उस बीमारी का आधा इलाज ट्रीटमेंट तो उसके कारण व लक्षण समझ लेने से ही हो जाते हैं dyspepsia treatment with home remedies in Hindi.

अपचन अजीर्ण से बचने के उपाय कैसे घर पर ही बदहजमी का घरेलु उपाय आजमा कर बड़ी ही आसानी से अजीर्ण अपच से हमेशा के लिए छुटकारा पाया जा सकता हैं.

English में अजीर्ण, बदहजमी को dyspepsia कहते हैं (ajirn meaning in english) और indigestion को English में अपचन, अपच कहते हैं (apach apachan meaning in english). और मंदाग्नि व अग्निमांध को English में Loss of appetite के नामो से जाना जाता हैं. खाए हुए आहार का ठीक प्रकार से पाचन न होना अजीर्ण या बदहजमी कहलाता हैं.

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Solution – Dyspepsia & Indigestion Treatment in Hindi At Home With Remedies

वैसे तो अपचन, अजीर्ण, बदहजमी, मंदाग्नि यह रोग ऐसे नहीं होते की डॉक्टर इसमें आपकी कुछ ख़ास मदद कर पाए. इसके लिए डॉक्टर आपको दवाइयां लिख कर दे देगा बस इसके अलावा वह ज्यादा कुछ नहीं करते. हां अगर रोगी को यह पेट के रोग ज्यादा भारी मात्रा में हो जाते हैं तो फिर जरूर डॉक्टर को दिखाना चाहिए.

लेकिन शुरुआत में इन रोगों का घर पर घरेलु इलाज कर लेना चाहिए. हमने यहां पर इससे सम्बंधित पूरी जानकारी दी हैं, कई तरह के आयुर्वेदिक घरेलु नुस्खे आदि सब कुछ बताये हैं. home treatment and ayurvedic remedies for dyspepsia and indigestion in Hindi language.

अगर आपको अपचन व सीने में जलन के लक्षण तीव्रता से आने लगे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाए, क्योंकि हार्ट-अटैक जैसे रोग के लक्षण भी इसी तरह होते हैं, इसलिए आपको सतर्क रहना चाहिए. इसके साथ ही जब भी आप डॉक्टर के पास checkup के लिए जाए तो अपने शरीर में हो रही सारी तकलीफों को पूरी तरह से साफ़-साफ़ बता दे, सारे लक्षणों के बारे में डॉक्टर को बताये.

  • Symptoms & Causes 

चिकनाईयुक्त/चिकने पदार्थों से बने आहार का ज्यादा सेवन व असमय भोजन यानी दिन हो रात कभी भी किसी भी समय भोजन करने की आदत, मादक द्रव्यों का सेवन – ऐसी चीजें जो पचाने में भारी व मांसाहारी होती हैं, अचार का सेवन , खटाई और गर्म मसालों का ज्यादा सेवन करना, रात में देर रात तक जागना, बहुमैथुन और जरुरत से ज्यादा मानसिक व शारीरिक परिश्रम से ये रोग उत्पन्न होते हैं. यह अजीर्ण, अग्निमांध, बदहजमी  के कारण होते हैं. indigestion and dyspepsia causes आइए सरलतम शब्दों में इसी बारे में और जानने की कोशिश करते हैं –

Indigestion Symptoms बदहजमी के लक्षण – (Dyspepsia Problem Cure  Hindi Me)

  • खान पान संबंधी गलत आदतें

मात्रा से व जरुरत से ज्यादा भोजन करने, समय पर यानी नियत समय पर भोजन न करने से, शाम का भोजन देर रात में खाने से, स्थायी रूप से अजीर्ण, अग्निमांध व अपचन रोग उतपन्न हो सकता हैं. इनडाइजेशन डिस्पेप्सिअ – दूसरा बड़ा अपचन का कारण होता हैं “सुबह शाम के भोजन में नियमित अंतराल न होने से और थोड़ी-थोड़ी देर बार कुछ न कुछ खाते रहने से, इस आदत की वजह से पाचन तंत्र को आराम नहीं मिल पाता जिससे अजीर्ण, अग्निमांध, बदहजमी रोग उत्पन्न होता हैं.

इसीलिए dyspepsia or indigestion permanently cure अजीर्ण व अपच से हमेशा के लिए छुटकारा पाने के लिए आपको अपने पाचनतंत्र को आराम देना होगा, और इसके लिए बार-बार कुछ न कुछ खाने की आदत छोड़ देना होगी. क्योंकि पाचनतंत्र की क्रियाशीलता के लिए उसको आराम न मिलना ही अजीर्ण, अपचन का मुख्य कारण हैं. (To improve indigestion quiet the habit of eating in minutes or hours, dyspepsia treatment natural remedy).

इसके साथ ही बिना चबाये व जल्दी जल्दी भोजन करने की आदत पर भी नियंत्रण करना होगा, क्योंकि अगर आप भोजन को अच्छे से बारीक-बारीक चबाकर नहीं खाएंगे तो इसको पचाने के लिए आपके पाचन तंत्र को ज्यादा कार्य करना पढ़ेगा, जिससे आपकी पाचनशक्ति क्षीण होगी. इसलिए जल्दी-जल्दी भोजन करने की आदत छोड़े व हर कौर को अच्छे से बारीक चबाकर खाये. इस कारण causes को नजरअंदाज़ न करे यह अजीर्ण, अपचन, अग्निमांध से बचने का उपाय हैं natural cure and prevention of indigestion.

क्या आपके पेट में जलन होती हैं, क्या आप एसिडिटी से परेशान हैं, तो इस एसिडिटी रोग से छुटकारा पाने के लिए – यह जरूर पड़ें >> एसिडिटी पेट में जलन का इलाज

Indigestion Home Remedies in Hindi (बदहजमी, अपचन, अजीर्ण का इलाज)

  • अमाशय के विकार

मांसपेशियों की कमजोरी के कारण अमाशय कुछ बड़ा हो जाता हैं और उसकी शक्ति कुछ कम हो जाती हैं जिससे अजीर्ण अस्थायी रूप से उत्पन्न हो जाता हैं. अमाशय में ह्य्द्रोक्लोरीदे एसिड कम बनता हैं तो पेप्सिन अपना काम नहीं कर पाता हैं, जिससे आहार का प्रोटीन वाला अंश नहीं पचता तथा आहार अमाशय से शीघ्र ही आंतों में चला जाता हैं. अमाशय में गांठ या सूजन होने पर ह्य्द्रोक्लोरीदे एसिड कम बनता हैं, इसलिए थोड़ा सा खाने पर ही पेट भर जाता हैं.

  • मानसिक कारण

शोक, चिंता, क्रोध, उदास रहना, बेवजह का गुस्सा, चिंताग्रस्त रहने की आदत आदि इन मानसिक कारणों से भी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती हैं. इसलिए जरुरी हैं की आप शारीरिक के साथ साथ मानसिक रूप से भी मजबूत बने.

  • शारीरिक व मानसिक रोग

शारीरिक रोग रक्ताल्पता तथा मानसिक रोग हिस्टीरिया में अजीर्ण पाया जाता हैं. तंत्रिका तंत्र की कमजोरी से भी अजीर्ण होता हैं, लेकिन यह अजीर्ण, अपचन, अग्निमांध व बदहजमी बड़े ही विचित्र प्रकार का होता हैं, क्योंकि इसमें रोगी खुद को कभी पूरी तरह से स्वस्थ महसूस करता हैं तो कभी बहुत ज्यादा तकलीफ महसूस करता हैं.

(बदहजमी  क्या है) वैसे सामान्यतः इस रोग में भूख नहीं लगती हैं. और इस रोग में दांतों में तकलीफ होने के कारण भोजन भी ठीक तरह से चबा नहीं पाता और बिना चबाए भोजन करना भी इस रोग की उत्पत्ति का प्रमुख कारण हैं. (अजीर्ण, अग्निमांध, अपचन) (इनडाइजेशन ट्रीटमेंट डिस्पेप्सिअ ट्रीटमेंट होम रेमेडीज) इस रोग के यह भी सबसे सामान्य लक्षण हैं जो की निम्नलिखित हैं –

  • पेट में भारीपन या पीड़ा होना
  • खट्टी डकारे आना
  • जिबान मलिन, गन्दी होना
  • मुंह का स्वाद बिगड़ जाना
  • इससे कब्ज भी उत्पन्न हो जाती हैं
  • अतिसार की शिकायत भी होती हैं
  • इस रोग के चलते रोगी की हालत बहुत कमजोर होती जाती हैं

अजीर्ण, अपचन, अग्निमांध, बदहजमी में क्या करे – Home Treatment Cure Tips

अजीर्ण, अपचन, बदहजमी का इलाज व चिकित्सा, सबसे पहले भोजन (पथ्य-अपथ्य) और भोजन करने की गलत आदतों को भी सुधारना चाहिए. अगर दांतों में किसी विकृति के कारण भोजन भली प्रकार न चबाया जाता हो तो दांतों की विकृति को दूर करवाना चाहिए.

भोजन नियत समय पर नियमानुसार व समयानुसार करना चाहिए. भोजन करते समय यह बात भी ध्यान में रखी जानी जरुरी हैं की अजीर्ण, अग्निमांध, बदहजमी के रोगी शारीरिक श्रम करता है अथवा मानसिक श्रम, क्योंकि शारीरिक श्रम करने वाला व्यक्ति भारी भोजन भी पचा लेता हैं, जबकि मानसिक श्रम करने वाले व्यक्तियों को हल्का भोजन ही सरलतापूर्वक पचता हैं.

इसीलिए अगर आपको शारीरिक श्रम ज्यादा करना पड़ता हैं तो ज्यादा भोजन कर सकते हैं और अगर शारीरिक श्रम कम और मानसिक श्रम ज्यादा करना पड़ता हो तो कम भोजन करे. ताकि शरीर को उसे पचाने में कोई तकलीफ न हो. best ever tips for treatment of indigestion dyspepsia in Hindi ayurvedic solution.

  • पानी ज्यादा पिए, दिन में करीबन 12-13 लीटर पानी का सेवा करे. गर्मी के मौसम में इससे ज्यादा पाने भी पिया जा सकता हैं.
  • रोजाना सुबह उठने के तुरंत बाद दौ तीन ग्लास पेट भरकर पानी पिए, इसके बाद 45 मिनट तक कुछ भी न खाये और न ही पिए. कुछ ही दिनों तक इस प्रयोग को करने से आपको कई आश्चर्यजनक लाभ दिखाई देने लगेंगे.
  • एक ग्लास पानी में सौंफ के दानो को उबालकर पिने से इन अपचन, अजीर्ण, बदहजमी आदि इन सभी रोगों में बहुत लाभ होता हैं.
  • एक ग्लास पानी में जीरा को डालकर अच्छे से उबाले, फिर इसका सेवन करे. ऐसा करने से पेट के सभी रोग indigestion व dyspepsia आदि सभी में राहत मिलती हैं.

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Top 15 Easy Dyspepsia & Indigestion Remedies -How To Improve!

(1). दौ चम्मच अदरक व एक चम्मच नींबू एक चिमटी काला नमक इन तीनो को मिलाकर खाने से बताये गए रोगों का जल्दी इलाज होता हैं. इसके साथ यह पाचन सम्बन्धी विकारो को भी दूर करता हैं.

(2). अजीर्ण, बदहजमी, अपचन को जल्दी दूर करने के लिए थोड़े से सेब के सिरके को एक ग्लास पानी में डालकर पिए (इसमें शहद भी मिल सकते हैं). सेब के सिर्फ के इस आयुर्वेदिक नुस्खे से indigestion dyspepsia का घरेलु इलाज हो जाता हैं.

(3). धनिये के बीजों को एक ग्लास छाछ में मिलाकर पिने से इन सभी रोगों में फायदा होता है. इसमें जीरा भी मिलाया जा सकता हैं. अति लाभदायक होता हैं.

(4). 1/2 चम्मच बेकिंग सोडा को एक ग्लास पानी में डालकर पिए. पेट में एसिड के वजह से हो रहे सभी उपद्रवों को मिटाने के लिए यह बहुत असरकारी होता हैं.

(5). 1/2 चम्मच दालचीनी को एक ग्लास पानी में डालकर उबाले, अच्छे से उबल जाने पर इसका सेवन करे. पेट में जलन, पेट में ऐठन आदि इन सभी में विशेष लाभ होता हैं.

(6). खट्टे फलों का सेवन करे, खट्टे फलों का सेवन इन सभी रोगों में बहुत रहत दिलाता हैं.

(7). पोदीना के रस की 4-5 बूंदे एक ग्लास पानी में मिलाकर पिने से इन सभी रोगों में बहुत लाभ होता हैं.

(8). अपचन, अजीर्ण, बदहजमी, अग्निमांद्य पेट के सभी रोगों में herbal tea का सेवन भी बहुत लाभदायक होता हैं.

(9). संतरे, मोसम्बी की छाल को निकलकर धूंप में सुखाये, सुख जाने के बाद इसे बारीक पीसकर खाये. कब्ज, एसिडिटी आदि सभी रोगों का आयुर्वेदिक इलाज व उपचार होता हैं. indigestion dyspepsia का effective treatment.

(10). इन रोगों से अगर कभी किसी व्यक्ति को पेट में दर्द होने लगे तो लहसुन की 2-3 कलियों को कुचल कर सोयाबीन के तेल में मिलाकर पेट पर मालिश करे.

अजीर्ण, अपचन, बदहजमी का सरल घरेलु उपाय व नुस्खे

(11). नींबू इन रोगों को दूर करने के लिए सबसे आसान और असरकारी रामबाण आयुर्वेदिक नुस्खा हैं. एक नींबू को एक ग्लास पानी में डालकर पिने से पेट के विभिन्न रोगों से छुटकारा मिलता हैं. अपचन, अजीर्ण, कब्ज, एसिडिटी, पेट दर्द, पेट के बैक्टीरिया आदि सभी में लाभ होता हैं.

(12). पाचन तंत्र से जुडी सभी परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए छाछ एक रामबाण उपाय हैं. रोजाना भोजन करने के बाद, सुबह के समय, या दिन में कभी भी छाछ का सेवन करे. इससे अपचन, कब्ज, एसिडिटी, अजीर्ण आपको जरा भी नहीं सतायेंगे.

(13). अजवाइन के बीजों को चबाने से इन सभी रोगों में बहुत लाभ होता हैं. easy and effective ayurvedic home remedy for indigestion and dyspepsia at home.

(14).सुबह खाली पेट आवला खाने से भी पेट के विभिन्न रोगों में बहुत लाभ होता हैं.

(15). भोजन करने केबाद अनानास का रस पिए, इससे आपको बिलकुल भी अपचन, अजीर्ण, बदहजमी, मंदाग्नि रोग नहीं होंगे.

Request – आपसे गुजारिश हैं की आप इस जानकारी को पूरा पड़े, अक्सर व्यक्ति यहां आते हैं और बिच में ही इसे अधूरा पढ़कर छोड़ जाते हैं, इसमें हमने ऊपर से लेकर निचे तक कई तरह के उपाय बताये हैं. इसलिए आप उन्हें जरूर पड़ें Note.

अब पढ़िए इन रोगों के सभी तरह के उपाय के बारे में, यह उपाय आयुर्वेदिक देसी आदि सभी तरह के हैं.

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क्या आपके पेट में कब्ज की शिकायत हैं, क्या आपको कभी भी कब्ज रोज हो जाता हैं, तो इस कब्ज के रोग से छुटकारा पाने के लिए यह घरेलु इलाज जरूर पड़ें 100% असरकारी हैं  >>> – कब्ज का रामबाण इलाज

71 Ayurvedic Home Remedies For Indigestion & Dyspepsia

  • अग्निमांध में भोजन करते वक्त अदरक के एक दौ छोटे टुकड़े नमक के साथ खाए या सुबह शाम तीन-तीन ग्राम की मात्रा में लवण भास्कर चूर्ण सेवन करे.
  • कुमारित्व 20 मि.ली. सामान भाग ताज़ा पानी में मिलाकर भोजन करने के बाद सेवन करना बहुत फायदेमंद होता हैं.
  • अग्निकुमार 125 मि.ग्रा. या अग्नितुंडी वटी 150 मि.ग्रा. सुबह या शाम के समय दिन में दौ बार शहद के साथ सेवन करने से बहुत लाभ होता हैं. अजीर्ण व अपचन का यह घरेलु उपाय इन हिंदी में बताया गया हैं बहुत गुणकारी व असरकारी सिद्ध होता हैं.

सनाय 30 ग्राम, मिश्री 20 ग्राम और सोंठ, सौंफ, जीरा, गुलाब के फूल व सेंधा नमक इन सभी को 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर कूट पीसले, इसके बाद इनको छानकर इनका चूर्ण बनाले. अब रोजाना इस चूर्ण को रात में सोते समय तीन ग्राम की मात्रा में बकरी या गाय के दूध या ताज़ा पानी के साथ सेवन करने से कब्ज, अग्निमांध, अजीर्ण, अपचन दूर होता हैं. यह अपचन व बदहजमी दूर करने का उपाय हैं.

गैसनॉल पेय – इस आयुर्वेदिक नुस्खे वाली दवा को दौ-दौ चम्मच दिन में दौ तीन बार नियमित रूप से सेवन करे. इससे अजीर्ण रोग में स्थायी लाभ होगा, यह आयुर्वेदिक नुस्खा “गैसनॉल पेय” अजीर्ण का इलाज के लिए बेहतरीन हैं.

द्राक्षासव और पुननर्वारिष्ट 20-20 मि.ली. सामान भाग पानी मिलाकर दिन में दौ बार भोजन करने के बाद खाये. यह चूर्ण बहुत ही असरकारी सिद्ध होंगे.

यकृत विकार में पुननर्वामण्ड़ोर 500 मि.ग्रा सुबह के समय शहद के साथ खाने से पाचन सम्बंधित सभी अवयवों की सूजन दूर हो जाती हैं. कब्ज आदि रोगों में अक्सर यह शिकायत देखने को मिलती हैं, इसमें आप बताये गए घरेलु उपाय को आजमा सकते हैं.

Baba Ramdev & Rajiv Dixit Cure’s For Health Issues

अजीर्ण में सोंठ का चूर्ण और सेंधा नमक 500-500 मि.ग्रा. मिलाकर गर्म पानी के साथ सुबह के समय सेवन करे व इसके साथ ही केसर 250 मि.ग्रा को कागजी नीबू के रस में घोटकर चाटें या चित्रकादि वटी 500 मि.ग्रा. सुबह व शाम को सेवन करे. इस घरेलु उपाय से अपचन, अजीर्ण, अग्निमांध का इलाज हो जाता हैं इन हिंदी में.

हींग, कालीमिर्च, पीपल और सेंधा नमक इन सभी को सामान्य मात्रा में लेकर पानी में अच्छे से पीस लें, इसके बाद अपने पेट पर इसका लेप करे. इससे अजीर्ण का इलाज होगा यह उपाय इसमें रामबाण की तरह उपयोगी होता हैं. पेट की सारी मांसपेशियों को गतिशील करता हैं.

टमाटर को कुछ सेंककर सेंधा नमक और कालीमिर्च लगाकर खाने से और टमाटर का रस 25 ग्राम लेकर, उसमे गर्म पानी व थोड़ा सा खाने वाला सोडा मिलाकर सेवन करने से अजीर्ण, अग्निमांध, अपचन में लाभ होता हैं.

अमाशय विकार में सामान्यतः प्रालपिष्टि 250 मि.लि.ग्रा. और सूतशेखर रस और स्वर्णमाक्षिक भस्म 125-125 मि.ग्रा. = 1 मात्रा मधु मिलाकर देना चाहिए. ऐसा कर आप अपचन, अग्निमांध, अजीर्ण आदि का घरेलु इलाज home treatment कर सकते हैं. यह रामबाण घरेलु उपाय हैं इनके लिए.

हिंग्वष्टक चूर्ण दिन में दौ बार भोजन करने से पहले तीन ग्राम की मात्रा में घी के साथ सेवन करे. यह सादाहरण सा लगने वाला चूर्ण अपचन, बदहजमी का रामबाण इलाज करेगा. इन सब का बेहतरीन का घरेलु उपाय हैं.

हाजमोला टेबलेट – दौ चार गोली सिर्फ पानी के साथ भोजन करने के बाद सेवन करे. यह विद्गगाजीर्ण की अवस्था में लाभकारी हैं. इसके साथ ही जिन लोगों को ज्यादा भोजन करने पर पेट में उपद्रव होते हैं, ऐसे लोगों के असरकारी घरेलु उपाय में से एक हैं देसी घरेलु इलाज.

आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से करे इलाज

नकछिकनी के बीज का चूर्ण 4-4 रत्ती गन में मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करे, बाद में एक-एक रत्ती बढ़ाते हुए मात्रा रहने से जठराग्नि दीप्त होती हैं और अजीर्ण का इलाज होता हैं इससे हमेशा के लिए छुटकारा मिलता हैं. बस इस बात की सावधानी रखे की “यह प्रयोग शीतकाल में ही किया जाए, क्योंकि यह प्रयोग शरीर में बहुत गर्मी पैदा करता हैं”

नीबू का सत्व (टाटरी) 25 ग्राम, खाने वाला सोडा 50 ग्राम, समुद्र लवण और सोंठ का महीन चूर्ण 10-10 ग्राम. इन सभी को लेकर बारीक चूर्ण बनाकर किसी मिटटी के पात्र में भरकर आग पर गर्म करें, जब दाने बन जाए तब उतारकर साफ़-स्वच्छ शीशों में भरकर सुरक्षित रख लें. इसमें एक चम्मच चूर्ण पानी में मिलाकर सेवन करें. यह फ्रूट साल्ट की तरह गुणकारी हैं. अजीर्ण और मंदाग्नि में रामबाण उपचार करता हैं.

सोंठ, सेंधा नमक और हरीतकी इन सभी को सामान्य मात्रा में लेकर महीन चूर्ण बनाकर तीन-तीन ग्राम की मात्रा में सेवन करने से अग्निमांध रोग दूर हो जाता हैं. अग्निमांध दूर करने के उपाय व नुस्खे में यह सबसे अच्छा अग्निमांध का घरेलु उपचार हैं.

धनिया और सोंठ का चूर्ण तीन-तीन ग्राम लेकर 100 ग्राम गर्म पानी में लेकर खाने से अजीर्ण का उपचार होता हैं, यह सबसे आसान और बेहतरीन बदहजमी, अजीर्ण दूर करने का घरेलु उपाय हैं, इस आसान नुस्खे को आप जरूर आजमा कर देखें.

सूखा खट्टा अनार दाना, सफ़ेद जीरा और काला नमक इन सभी को सामान्य मात्रा में मिलाकर चूर्ण बनालें और फिर गर्म पानी के साथ इसका सेवन करे. इसके उपयोग से अपचन, बदहजमी, अजीर्ण रोग पूरी तरह से दूर होता हैं.

छोटी हरड़ को अच्छे से भूनकर काले नमक के साथ खाने से अजीर्ण, अपचन, बदहजमी का उपचार होता हैं. यह छोटा सा उपाय इन रोगों में अति गुणकारी होता हैं.

घर पर ही कीजिये इन पेट के रोगों का उपचार

नीबू स्वरस 200  ग्राम में 100  ग्राम शक्कर मिलाकर किसी कांच के बर्तन में भरकर 15 दिनों तक धुप में रख दें. इसके बाद भोजन के साथ इसे चाटने से पाचन शक्ति बढ़ जाती हैं जिससे अजीर्ण बदहजमी रोग का उपचार होता हैं. यह indigestion और dyspepsia home remedies में से सबसे अधिक गुणकारी हैं. पाचन तंत्र से जुड़े रोग जैसे कब्ज, अजीर्ण, अपच , अग्निमांध, बदहजमी आदि सभी रोग इससे दूर किये जा सकते हैं.

सोंठ, इलाइची और दालचीनी इन सभी को सामान्य मात्रा में लेकर पीस छानकर चूर्ण बना लें, फिर इस चूर्ण को खाना खाने से पहले 1 ग्राम की मात्रा में ताज़ा पानी के साथ खाले. इससे भोजन में अरुचि, मंदाग्नि, अपचन आदि में रामबाण लाभ होता हैं. इससे मंदाग्नि का इलाज होता है जो की सर्वोत्तम व आसान हैं इनडाइजेशन ट्रीटमेंट रेमेडीज हिंदी में.

भुनी हींग, भुना जीरा, सोंठ और सेंधा नमक सभी को सामान्य मात्रा में लेकर अच्छे से पीस लें. इसको पीसकर चूर्ण बना लें. इसके बाद रोजाना भोजन करने के बाद नियमित रूप से रोजाना कुछ दिनों तक इसका सेवन करे. इसके सेवन से अजीर्ण, अपचन, बदहजमी आदि रोग जड़ से ख़त्म होते हैं. यह अजीर्ण के लिए तो बहुत ही असरकारी आयुर्वेदिक घरेलु नुस्खे में से एक हैं.

तुलसी के पत्तों का 10 ग्राम की मात्रा में कुछ दिनों तक रोजाना सेवन करने से अजीर्ण, अपचा, बदहजमी का विकार जड़ से नष्ट होता हैं.

पीपर का चूर्ण शहद के साथ कुछ दिनों तक रोजाना चाटने से पाचन शक्ति तेजी से बढ़ती हैं. जिससे अपचन, मंदाग्नि व अजीर्ण आदि रोग दूर होते हैं. आयुर्वेदिक घरेलु नुस्खे – यह सबसे बेहतरीन नुस्खों में से एक हैं जरूर आजमाए.

अगर खाना खाने के बाद सीने में जलन होती हैं तो यह जरूर पड़ें – >>>  सीने में जलन का इलाज & उपाय

यह सभी रसोई घर में से आसानी से प्राप्त किये जा सकते हैं

कालीमिर्च 5 नग, मुनक्का 7 नग, टाटरी 4 रत्ती और सेंधा नमक 6 ग्राम की मात्रा में लें. अब इन सभी को अच्छे से पीसकर चटनी बना लें, चटनी बनाकर इसको चाटे, इससे अजीर्ण, अरुचि, मलावरोध, अपचन आदि में रामबाण उपचार होता हैं.

अदरक का रस 5 ग्राम, नीबू का रस 3 ग्राम, मुनक्का 5 नग, भुना जीरा 1 ग्राम अब इन सभी को एक साथ मिला लें और अच्छे से पीसकर चटनी बना लें. चटनी बन जाने के बाद इसका सेवन दिन में तीन बार करे, यानी इस चटनी को दिन में तीन बार चाटें. ऐसा करने से अजीर्ण, अपचन और मंदाग्नि में विशेष लाभ होता हैं.

कड़वी कुठ 100 ग्राम, काला नमक 400 ग्राम इन दोनों का चूर्ण बनाकर 4 रत्ती की मात्रा में एक बार सेवन करने से अजीर्ण, अपचन व बदहजमी रोग में विशेष लाभ होता हैं, सेहत के रोग को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक घरेलु नुस्खे इन हिंदी में.

2 चम्मच (पिसे हुए) काले तिल और एक चम्मच शहद मिलाकर या फिर अनन्नास का रस आधा कप में थोड़ा सा काला नमक डालकर पिने से भी अजीर्ण, अपचन, बदहजमी में का सरल उपचार होता हैं.

कागजी नीबू का रस एक किलो और इसमें 500 ग्राम अमलताश का गुदा मिलाकर किसी कांच के बर्तन में भिगो दें. तीन दिन तक भिगोने के बाद मसलकर रख लें. इसके बाद इसमें सोंठ, तज़ा , पीपर, कालीमिर्च, छोटी इलाइची 20-20 ग्राम, भुना हुआ सफ़ेद जीरा, कालादाना, भुना हुआ काला नमक, सेंधा नमक और मुनक्का 50-50 ग्राम, भुनी हुई हींग, 10 ग्राम डालकर सूखा लें और चूर्ण बना लें. यह मंदाग्नि में सबसे सफल आयुर्वेदिक घरेलु नुस्खे में से एक हैं इसके जरिये आप घर पर ही अपचन आदि का उपचार कर सकते हैं. इसको रोजाना 1-2 ग्राम की मात्रा में भोजन करने के बाद पानी के साथ खाये.

अपचन, अजीर्ण, मंदाग्नि, बदहजमी से बचने के तरीके

लाजवंती (छुई-मुई) की पत्तियों को पीसकर नाभि पर लें करने से अजीर्ण रोग बहुत जल्दी ठीक हो जाता हैं. इसका प्रयोग अजीर्ण, बदहजमी, अपचन आदि के रोगी को 15 दिनों तक लगातार करते रहना चाहिए वह भी रात्रि के समय में.

पके हुए बेल का शरबत 20 दिनों तक सेवन करने से अजीर्ण रोग दूर हो जाता हैं.

जामुन की छाल की भस्म आधा चम्मच भर शहद के साथ चाटने से या फिर 2 गांठे लहसुन की छीलकर व पीसकर उसमें 1 चुटकी काला नमक, आधा चुटकी पीसी हुई हींग और आधा चम्मच सूखे पोदीने का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से अजीर्ण, बदहजमी, अपचन का घरेलु उपचार करता हैं डिस्पेप्सिअ ट्रीटमेंट आयुर्वेदिक रेमेडीज.

1 चम्मच अदरक के रस में थोड़ा सा नीबू का रस मिलाकर सेवन करने से अजीर्ण, बदहजमी पूरी तरह से नष्ट हो जाती हैं.

2 चम्मच प्याज के रस में जरा सा काला नमक मिलाकर सुबह के समय सेवन करने या कालीमिर्च या लौंग 3-3 नग तथा नीम की कलियां 30 नग इन तीनो को पीसकर जरा सी शक्कर मिलाकर लगातार 15 दिनों तक सेवन करने से अथवा लौंग व हरड़ 2-2 नग और काला नमक 2 चुटकी भर लेकर 1 कप पानी में औटावे. जब यह जलकर आधा कप जल शेष रह जाए तब इस काढ़े को छानकर सेवन करने से बदहजमी अजीर्ण में रामबाण उपचार होता हैं, यह इन सभी को दूर करने के लिए बेहतरीन उपाय हैं असरकारी घरेलु उपचार व इलाज.

पीपल का चूर्ण रोजाना 3 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ खाने से अथवा दालचीनी, सोंठ और लाल इलाइची इन तीनो को सामान मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर भोजन करने से पहले 2 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से अजीर्ण, बदहजमी में कई लाभ होते हैं.

Ayurvedic Treatment Tips in Hindi Language At Home

अग्नि बल्ल्भक्षार – एक दौ चम्मच भोजन करने के बाद गर्म पानी के साथ खाये. यह आयुर्वेदिक घरेलु उपाय अग्निमांध, अजीर्ण, बदहजमी के घरेलु उपाय में सबसे बेहतरीन हैं, यह अति उत्तम चूर्ण हैं. अगर आप इसका नियमित सेवन करते हैं तो इन सभी रोगों से आपको स्थाई रूप से छुटकारा मिल जाएगा.

डाइजेस्टिन टेबलेट – दौ चार गोली दिन में तीन चार बार गर्म पानी के साथ सेवन करने से या फिर मुंह रख कर चूसने से. अजीर्ण, अग्निमांध, अपचन प्रत्येक रोग में लाभकारी सिद्ध होती हैं. घरेलु इलाज ट्रीटमेंट के लिए यह उपाय बहुत असरकारी हैं. गैस के रोग में भी फायदेमंद होता हैं.

पाचन टेबलेट – मात्रा, प्रयोग विधि, लाभ पूर्ववत ये गोलियां मंदाग्नि अजीर्ण के साथ-साथ मालवरोध व आध्यमान भी हितकारी हैं.

शुक्तिन टेबलेट – या तो खाना खाते समय या फिर खाना खा लेने के बाद दौ-दौ टेबलेट दिन में तीन बार अजीर्ण, अपचन, बदहजमी के रोगी को दें.  यह इनडाइजेशन के ट्रीटमेंट के लिए असरकारी हैं.

गारलीलापिल्स – एक दौ पिल्स खाना खाने के तुरंत बाद पानी के साथ लें. यह मलावरोध, अजीर्ण, बदहजमी आदि में रामबाण इलाज करती हैं. सिर्फ जिन लोगों को बवासीर रोग हो वह इस आयुर्वेदिक इलाज के उपाय गारलीलापिल्स का उपयोग न करे.

पाचक वटी -दौ चार गोली दिन में तीन बार लें, यह हाजमे की कमजोरी, पेट दर्द, अजीर्ण, गैस, बदहजमी, अपचन में अति उत्तम सिद्ध होता हैं.

पाचनमृत – दौ तीन चम्मच दिन में दौ तीन बार खाना खाने के बाद सेवन करे. यह अजीर्ण के साथ साथ गैस में भी लाभदायक सिद्ध होती हैं. कब्ज, बदहजमी, अपचन आदि सभी में उपयोग में लाइ जा सकती हैं.

Allopathic Treatment For Indigestion and Dyspepsia

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डिस्पेप्टल ड्रेंगी (Dispeptal) एक दौ टेबलेट भोजन करने के बाद दिन के समय में इस दवा को तीन बार लें. इसके प्रयोग से अजीर्ण, बदहजमी , अपचन का इलाज हो जाता हैं. यह बदहजमी व अपचन का घरेलु उपाय हैं जो की किसी भी आयुर्वेदिक नुस्खे की तरह काम करेगा.

विट्जाइम (Vitazyme) – एक दो चम्मच की मात्रा में दिन में करीबन दौ से तीन बार इसको पानी में मिलकर खाने से अपचन, अजीर्ण आदि में बहुत लाभ होता हैं, सामान्य घरलू नुस्खे व उपाय.

विटामिन बी काम्प्लेक्स फोर्ट – (Vita B. Complex fort) 1-2 मिली का इंजेक्शन रोजाना या 1 दिन बिच में छोड़कर मांसपेशियों में लगाए. Vitamin B की कमी से पैदा हुए रोग इसके प्रयोग से दूर होकर शारीरिक बल में वृद्धि होती हैं. यह यकृत को ठीक करके रक्त की वृद्धि करते हुए पाचन शक्ति सशक्त करने हेतु उपयोग में लाये.

फेस्टल ड्रेगी (Festal Dragee) 1-2 ड्रेगी दिन में 3 बार भोजन के साथ या बाद में मुंह में रख कर चूसे मंदाग्नि, अपचन, बदहजमी का घरेलु उपाय में से यह सर्वश्रेष्ठ हैं.

डिगिटों सिरप (Dizytone) – दवा (शीशी) के साथ प्राप्त टिकिया को शीशी में घोलकर प्रयोग करे. एक दौ चम्मच दवा दिन में दौ तीन बार पानी में घोलकर लें. अजीर्ण के घरेलु उपाय की इस दवा का दूसरा नाम यह हैं – “इलिक्लीजर डिजिपलेक्स” इस नाम से भी यह दवा बाजार में उपलब्ध हैं.

मोलजाइम टेबलेट (Molzyme) इसके 1-2 टेबलेट का दिन में 2-3 बार सेवन करे. यह घरेलु नुस्खे से भी बेहतर असरकारी होगा इलाज में सहायता मिलेगी.

बिस्मोजाइम पेय (Bismozyme) आधा से दौ चम्मच दिन में दो तीन बार सामान्य मात्रा में पानी के साथ मिलाकर खाने से इस रोग का घरेलु इलाज होता हैं. यह घरेलु उपाय उपयोग में भी बहुत आसान हैं सिर्फ पानी में घोलकर सेवन करना हैं.

Allopathic Cure+

  • बेस्टोजाइम (Bestozyme) – दौ-दौ चम्मच दिन में दौ तीन बार पानी में घोलकर लें अजीर्ण, अपचन, बदहजमी का इलाज हो जायेगा. इसका सेवन प्रयोग विधि भी बहुत ही आसान हैं.
  • इंजेक्शन यूबीसीड (Ubicid) 1-2 मिली रोजाना या एक दिन बिच में छोड़कर प्रयोग करे.
  • नियोपेप्टिन कैप्सूल (Neopeptin) 1-2 कैप्सूल रोजाना 2-3 बार भोजन करने के बाद लें.
  • असिडोल पेप्सिन टेबलेट (Acidol Pepsin) बड़ी उम्र के व्यक्तियों को दौ चार टेबलेट व कम उम्र के बच्चों को एक दौ टेबलेट, शिशुओं को आधा टेबलेट पानी में घोलकर दें. यह अजीर्ण, अपचन, बदहजमी का इलाज करने में बड़ी सक्षम हैं dyspepsia indigestion treatment in Hindi.
  • इंजेक्शन बी. प्लेक्स फोर्ट विद बी-12 (Be Plex Forte with B-12) – 1-2 मि.ली रोजाना और एक दिन बिच में छोड़कर मांस या शिरा में 5 गुना ग्लूकोज, नार्मल सैलाइन या डिस्टिलेड वाटर में घोलकर धीरे-धीरे लगाए.

क्या आप भी दांत दर्द से परेशान हैं, और क्या आपके दांतों में दर्द कभी भी होने लग जाता हैं, तो आप यह जानकारी जरूर पड़ें. यहां पर आप जानेंगे की कैसे दांत दर्द का घर पर ही इलाज किया जाए, दांतों के दर्द से छुटकारा पाने के लिए आप यह जरूर पड़ें – दांत दर्द के घरेलु नुस्खे उपाय

डॉक्टर को कब दिखाए – घरेलु इलाज व उपचार

यह सभी रोगो वैसे तो बहुत ही सामान्य हैं, और कई हद तक इनका इलाज घर पर ही किया जा सकता हैं. अगर आपको इनके लक्षण तीव्र रूप में दिखने लगे व आप इन रोगों से बिलकुल ही परेशान हो गए हो तो फिर आप डॉक्टर की मदद ले सकते हैं. क्योंकि यह रोग बहुत ही सामान्य होते हैं, इनके लिए डॉक्टर से Checkup लेने की कोई खास जरूरत नहीं होती. अग्निमांद्य, अपचन, बदहजमी पेट का रोग घरेलु उपाय नुस्खे से इलाज कैसे करे तरीके 

उम्मीद करते हैं आपको यहां दी गई हुई indigestion treatment problem in Hindi जानकारी अच्छी लगी होगी. अगर आपको यह जानकारी पसंद न आई हो, अगर यह जानकारी आपके काम न आई हो तो अपनी शिकायत व सुझाउ Comment के जरिये हम तक पहुंचाए. The dyspepsia treatment at home with natural ways. Best home remedies for indigestion.

Tip : इन रोगों से बचने के लिए हम सुबह खाली पेट 3-4 ग्लास पानी पीते है, व इसके बाद 45 मिनट तक कुछ भी नहीं खाते पीते हैं. जब से हम इस प्रयोग को कर रहे हैं तब से हमे कोई पेट का रोग नहीं हुआ हैं.

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