हल्दी के बारे में जानकारी, हल्दी के नाम और पौधा

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हल्दी के बारे में कौन नहीं जानता , सभी इससे अच्छे तरीके से जानते है. यह हर घर के रसोई में मिल जाएगी. इसमें कई तरह के गुण व पोषक तत्व होते है जो की शरीर को भी पुष्ट करते है और सुंदरता भी प्रदान करते है. आइये जाने हल्दी की जानकारी के बारे में.

देश के सभी प्रदेशो में हल्दी की खेती की जाती है. महाराष्ट्र, बिहार, बंगाल और तमिलनाडु में बहुत मात्रा में हल्दी की खेती की जाती है. कई प्रदेशों में हल्दी को अलग अलग नामों से सम्बोधित किया जाता है. संस्कृत में हल्दी को हरिद्रा, बंगाली में हल्दू, कश्मीरी में अभिनिम, मराठी में हलद, तमिल में मंजिल, तेलगु में पसुपु और पंजाबी में हरदल के नाम से सम्बोधित किया जाता है. हल्दी को यूनानी चिकित्सा में भी बहुत उपयोग किया जाता है. फ़ारसी में हल्दी को जर्दचोव लेटिन में कुकुरमालोंगनिं और अंग्रेजी में टर्मेरिक कहा जाता है. हल्दी को रोग विकार नष्ट करने के साथ सौंदर्य प्रसाधन के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. हल्दी और चन्दन से अनेक गुणकारी सौंदर्य प्रसाधन बनाये जाते है.

हल्दी की बुवाई भुरभुरी मिटटी वाली भूमि में अप्रैल के बिच से जुलाई के महीने तक की जाती है. इसके पौधे तीन चार फुट तक ऊँचे होते है और इसके पत्ते काफी लम्बे होते है. हल्दी के पत्तों में आम की मंजरी बौर जैसी सुगंध आती है. हल्दी के पौधों में पिले रंग के बड़े बड़े फूल आते है. पौधों के निचे भूमि में जड़ों के रूप में हल्दी पैदा होती है. शुरुआत में हल्दी की जड़ गांठे धूम मिटटी में सनी-पुती यानी धूम मिटटी से चिपकी हुई होती है.

लेकिन हल्दी को पानी से साफ़ स्वच्छ करने के बाद धुप में सुखाते समय इसकी गांठों को कपडे की पोटली से बांधकर कढ़ाव में उबलते पानी में डाल दिया जाता है. इसमें हल्दी की पत्तियां भी डाली जाती है जिससे हल्दी का रंग गहरा हो जाता है. इसमें हल्दी की पत्तियां भी डाली जाती है जिससे हल्दी का रंग गहरा हो जाता है. धुप में सुखाने से हल्दी पिले रंग में बदल जाती है. हल्दी को अदरक यानी आद्रक कूल वंश की वनस्पति कहा जाता है. हल्दी चार तरह की होती है. 1. साधारण हल्दी, 2. आमा हल्दी, 3. वन हल्दी या काली हल्दी, 4. दारु हल्दी.

हल्दी कैंसर, गठिया रोग, शुगर, कोलेस्टेरोल, इम्युनिटी, मोटापा, अल्ज़हाइमेर, पाचन शक्ति, लिवर इन्फेक्शन, वायरल इन्फेक्शन, त्वचा के रोग, खून की सफाई, आंखो की रोशनी आदि कई अन्य फायदे होते है. हल्दी को सब्जी में डालने से स्वाद और सब्जी की गुणवत्ता बढ़ जाती है यह वात, पित्त और कफा को भी कण्ट्रोल करती है.

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