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कब्ज़ के लिए 30 घरेलु नुस्खे – Constipation in Hindi

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कैसे कब्ज़ कॉन्स्टिपेशन के घरेलु नुस्खों से क़ब्ज़ से छुटकारा पाया जाए दादी मा, बाबा रामदेव. आयुर्वेदा में कब्ज को सब बीमारियों की जड़ मानते हैं. एक बार कब्ज का मर्ज हो जाए और रोगी खाने पिने में लापरवारी करे, खूब उल्टा -सीधा खाए तो कब्ज की खराबी से बवासीर, अफारा, पेट में दर्द, आंतों में सूजन, भगन्दर, गुर्दों में दर्द, गुर्दे में सूजन, बस्ती शूल, भूख की कमी, गैस्ट्रासिड्स, अजीर्ण और शरीर में विभिन्न अंगों में सूजन रोग उतपन्न हो सकते हैं. गुदा में सूजन, कांच निकलने के मर्ज भी कब्ज के कारन होते हैं.

कब्ज होने की यह वजह होती हैं – दादी मा – कब्ज की उत्पत्ति बहुत साधारण रूप में होती हैं. जब कोई स्त्री पुरुष उष्ण, गरिष्ठ व देर से पचने वाला, कच्चा, अधिक ठंडा, बासी और प्रकृति के विरूद्ध भोजन करता हैं तो यह उसकी आंतों में पहुंचकर खुश्क मल हो जाता हैं. खुश्क मल आसानी से नहीं निकल पाता और कई-कई दिन आंतों में रुका रहता हैं. मल का आंतों में रुका रहना ही कब्ज कहलाता हैं. यही से कब्ज रोग उतपन्न होता हैं फिर इसको दूर करने के लिए आपको कब्ज़ के घरेलु नुस्खे (देसी) इन हिंदी के बारे में सर्च करना पड़ता हैं..kabj ke nuskhe, gharelu nuskhe for kabj

कुलंज में भी आंतों में मल रुक हुआ रहता हैं, लेकिन कुलन रोग में पेट में तेज दर्द होता है. कब्ज में पेट में भारीपन अनुभव होता हैं. कुछ भी खाने की इच्छा नहीं होती है. कुछ लोग रोजाना सुबह के समय शौच जाने के लिए बीड़ी सिगरेट, चाय कॉफ़ी पीते हैं. शरीर में जल की कमी के कारण भी कब्ज हो सकती हैं. भोजन में घी, मक्खन, दूध आदि वसायुक्त चीजों की कमी होने से भी कब्ज होने लगती हैं.

दादी मा कब्ज़ के घरेलु नुस्खे इन हिंदी में फॉर कॉन्स्टिपेशन

Constipation कब्ज के लिए नुस्खे, घरेलु सुझाउ, खूब खाने पिने की आदत होने पर जब कुछ लोग बिस्तर पर पड़े देर तक आराम करते हैं और कोई शारीरिक श्रम मेहनत -मशक्कत नहीं करते हैं तो अधपका भोजन उनकी आंतों और अमाशय में पड़ा रहता हैं. ऐसे लोग कब्ज के शिकार होते हैं. आयुर्वेदा के विशेषज्ञों के अनुसार जब पित्त पूरी मात्रा में आँतों में नहीं पहुँच पाता तो अधिक बलगम होने के कारण कब्ज की उत्पत्ति होती हैं. आंतों पर अचानक किसी कारण से दबाव पड़ने पर कब्ज हो जाती हैं.

अधिक चाय, कॉफ़ी पिने से कब्ज की गड़बड़ी होती है क्योंकि चाय, कॉफ़ी की गर्मी आंतों और अमाशय की पाचन क्रिया को नष्ट करके खुश्की उतपन्न करती हैं. ऐसे में अम्लीय खट्टी चीजे खाने, शराब पिने से खुश्की बनकर अधिक कब्ज होती हैं. अधिकांश गर्भवती स्त्रियों को गर्म के बढ़ने पर कब्ज की शिकायत हो जाती हैं. गर्भवस्था में मिटटी और राख खाने वाली स्त्रियों को गर्भ के बढ़ने पर कब्ज की शिकायत हो जाती हैं. गर्भावस्था में मिटटी और राख खाने वाली स्त्रियों को कब्ज बहुत हानि पहुंचाती हैं.

कुछ रोगों के चलते कब्ज की जड़बड़ बहुत होती हैं. रक्ताल्पता एनीमिया यरक़ान पीलिया, जिगर की सूजन, तिल्ली की सूजन, और अजीर्ण होने पर कब्ज भी हो जाती हैं. टाइफाइड में भी कब्ज होने पर रोगी को पेट में बहुत दर्द होता हैं. कब्ज होने पर पेट में गैस बनने से रोगी को चक्कर भी आने लगते हैं बवासीर में भी कब्ज हो जाती हैं.

कब्ज की पहचान व इसे दूर करने के लिए आयुर्वेदिक व देसी घरेलु नुस्खे

Constipation अधिक ठंडी चीजें खाने पिने से आंतों की शक्ति क्षीण हो जाने के कारण मल को निष्कासित करने में रुकावट होने लगती हैं. ऐसे में भारी और गरिष्ठ देर से पचने वाली चीजें खाने से, आंतों में मल खुश्क होने से सुद्दे बन जाते हैं. मानसिक तनाव से पीड़ित और सोच-विचार में खोए रहने वाले लेखक, बुद्धिजीवी और मानसिक कामों में अधिक व्यस्त रहने के कारण कब्ज के अधिक शिकार हो जाते हैं घरेलु नुस्खे फॉर कब्ज़ कॉन्स्टिपेशन.

कब्ज की पहचान कैसे की जाए – लक्षण – कब्ज होने पर रोगी को कई=कई दिन शौच नहीं होती. मल खुश्क होकर आँतों में सड़ने लगता हैं. मल के सड़ने से पटे में दूषित वायु गैस बनने लगती हैं. जब गैस ऊपर की तरफ उठती है तो सर में दर्द होने लगता हैं. सर में चक्कर आने और आँखों के सामने अँधेरा फैलने की गड़बड़ होने लगती हैं. कब्ज के रोगी के मुंह और गुदा मार्ग से दुर्गन्धयुक्त वायु निकलने लगती हैं.

कब्ज के रोगी को बहुत जोर लगाने थोड़ा सा मल निकलता हैं. सुददों के बन जाने की वजह से मल निष्कासित करते समय जोर लगाने पर गुदा में जख्म हो जाते हैं, जिससे मल द्वार में से खून भी निकलने लगता हैं. इसी के चलते कब्ज के कई रोगियों को बवासीर के शिकायत भी हो जाती हैं.

ऐसे में रोगी को बहुत तकलीफ होती हैं. कब्ज के कारण पेट में अफारा हो जाता हैं. कब्ज के कारण पेट में दर्द होना भी सबसे बड़ी पहचान हैं. रोगी को हर समय पेट भरा-भरा सा अनुभव होने लगता हैं. पेट में भारीपन होने से बेचैनी होती हैं. ऐसे में भूख मरने लगती हैं. रोगी का उत्साह और चुस्ती नष्ट हो जाती हैं. किसी काम में मन नहीं लगता. कब्ज के रोगी की जीभ पर मैल की परत दिखाई देने लगती हैं.

Top 30 Dadi Ma Ke Gharelu Nuskhe for Constipation in Hindi

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कब्ज को ख़त्म करने के लिए बहुत सी दवाइयां हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कब्ज को नष्ट करने के लिए बार बार कब्ज की दवा लेना अच्छा नहीं होता क्योंकि जुलाब लेने से आदत बन जाती हैं, व यह दवाइयों पेट को ख़राब भी करती हैं. इसलिए कब्ज क…….कब्ज को नष्ट करने के बाद रोगी को अपने आहार पर ध्यान देना चाहिए. भोजन के साथ हरी सब्जियों और फलों का सेवन करने से जल्दी व आसानी से कब्ज नहीं होती. घी, मक्खन और दूध का उचित मात्रा में इस्तेमाल करने से भी कब्ज नहीं होती हैं.

क्या आप कब्ज के देसी व आयुर्वेदिक नुस्खे जो की दुनिया के आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने बताये हैं उनकेबारे में और जानना चाहते हैं, तो आपको यह लेख जरूर पढ़ना चाहिए. (इस लेख को आराम से पूरा पढ़ने के बाद ही यह पढ़ें) >>> कब्ज का रामबाण इलाज — एक बारे जरूर पढ़ें, नजरअंदाज करने से कुछ नहीं होगा.

30 effective remedies

(1). उसारा ग़ाफ़िस और रेवन्द चीनी दोनों 7-7 माशे, गारिकूं 35 माशे, चीनी साढ़े 52 माशे लेकर सबको कूट पीसकर पानी मिलाकर गोलियां बना लें. रात को सोने से पहले साढ़े तीन माशे गोली जल के साथ इस्तेमाल करने से मलावरोध कब्ज नष्ट हो जाता हैं.

Anjir

(2). 5 दाने पिले अंजीर के, पांव भर 250 ग्राम दूध में देर तक उबालें. अंजीर के दानो को छानकर, उस दूध को सुबह पिने से कब्ज नष्ट होती हैं.

(3). 5 तोले एरंड का तेल (रेंडी का तेल) पांव भर (250 ग्राम) दूध में मिलाकर, हल्का गर्म-गर्म पिने से सुबह खुलकर शौच आता हैं. कब्ज को नष्ट करने के लिए दूध में घी मिलाकर भी पि सकते हैं,यह बहुत ही आसान कब्ज्ज का घरेलु नुस्खे हैं अपनाइये इन हिंदी में. 

(4). 5 तोले गुलाब के अर्क में पिले एलुआ को 4 तोले मात्रा में भिगोकर रखे. इसमें रूमी मस्तगी 3 माशे, सफ़ेद निषेध 6 माशे और मुलहठी का सात 1 तोला कूट पीसकर मिला दें. फिर कुछ घंटे तक खरल करके, खुश्क होने पर चने बराबर गोलियां बनाकर छाया में सूखा लें. हर रोज 3-4 गोली रात्रि को सोने से पहले हलके गर्म पानी से या दूध के साथ सेवन करने से कब्ज नष्ट होती हैं.

कब्जियत दूर करने के लिए देसी नुस्खे

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(5). 1 तोला इसबगोल रात को सोते समय पानी के साथ सेवन करने से कब्ज से छुटकारा मिलता हैं.

(6). कफ विकृति के कारण कब्जुल अमाया होने पर जुबारिश कमुनि 7 माशे खिलाकर ऊपर से 5 माशे सोंफ, 3 माशे कुसुम के जइब और मुनक्का के बीज निकलकर 9 दाने, 12 तोले सोंफ को अर्क में पीसकर, 4 तोले खमीरा बनफशा के साथ पिलाने से कब्ज का नामोनिशान भी नहीं रहता.

(7). शुद्ध जमालगोटे के बीज की गिरी 3 माशे, मीठे बादाम की गिरी 6 माशे, एरंड के बीज की गिरी 6 माशे और मिश्री 1 तोला लेकर, सबको खूब कूट-पीसकर काली मिर्च के बारबर छोटी-छोटी गोली बना लें. प्रतिदिन एक या दो हल्के गर्म जल या दूध के साथ लेने से कब्ज दूर होती हैं.

(8). भुना हुआ सुहागा 9 माशा, काली मिर्च साढ़े 3 तोले, खुरासानी अजवाइन 8 माशे, सकोतरी एलुआ 4 तोले, 8 माशे इन सबको कूट पीसकर घीकुँवार के रस में कई दिन तक घोटकर, खुश्क होने पर चने बराबर गोलियां बनाकर छाया में सुखाकर रखें. २ गोली रात को सोते समय जल के साथ खाने से कब्ज नष्ट हो जाती हैं. रोगी को खूब भूख लगने लगती हैं. पाचनक्रिया भी तेज हो जाती हैं.

(9). सफ़ेद निशोथ, काला दाना, रेवन्द कहते तीनो एक-एक तोला, शुद्ध जमालगोटे की गिरी 20 दाने. इन सबको कूट-पीसकर, बिहिदाने का लुआब 6 माशे मिलाकर सबको खरल में घोटकर गोलियां बना लें. २ से ६ गोली पानी के साथ खाने से कब्ज पूरी तरह से नष्ट हो जाती हैं.

होम रेमेडीज फॉर कब्ज क़ब्ज़ constipation

(10). जंगी हरड़ अमलतास का गुदा, नागरमोथा, पीपलमोथा. कुटकी इन सबको 6-6 माशा लेकर आधा किलो पानी में औटाये, अच्छे से मिक्स कर लें. जब चौथाई पानी शेष रह जाए, तब उतारकर छान लें. इस कवाथ के सेवन से दस्त साफ़ होता हैं. यह बहुत ही असरकारी कब्ज दूर करने का घरेलु नुस्खा हैं इन हिंदी में दादी मा.

(11). यदि रोगी को तापमान हाई (गर्म मिजाज) हो तो 20 ग्राम गुलकंद, 15 बीज निकाले हुए मुनक्के तथा 6 माशा निम्नलिखित चूर्ण इन सबको मिटटी की एक छोटी सी हांडी में डालकर ऊपर से 375 ग्राम पानी डालकर आग पर पकाइए, जब आधा पांव पानी रह जाए तब उतारकर मलकर छान लें, तब सेवन कराये. इससे रोगी को दस्त होगा और गर्मी भी शांत होगी.

(12). कब्ज़ की अधिकता के कारण यदि बुखार में दस्त कराना हो तो 2-2 तोला अरंडी के तेल को 250 ग्राम दूध में मिलाकर दें. यह गर्भवती स्त्री तक को दिया जा सकता हैं. अगर व्यक्ति को कब्ज की वजह से बुखार आया हो तो भी इस कब्ज के आयुर्वेदिक घरेलु नुस्खे का उपयोग किया जा सकता हैं.

(13). काली निशोथ का चूर्ण तीन माशा को 6 माशा शहद में मिलाकर चाटने से रोगी को दस्त होता हैं. ज्वरों में दस्त कराने के लिए यह सर्वोत्तम उपचार हैं. यह कब्जे के सबसे सरल आयुर्वेदिक नुस्खे में से के हैं दादी मा.

(14). गुथल निकाली हुई बड़ी हरड़ का मुरब्बा एक या दो नग खिलाकर ऊपर से 250 ग्राम दूध पीला देने से ही 3-4 दस्त हो जाते हैं. नाजुक मिजाज रोगी को एक हरड़ से ज्यादा नहीं देनी चाहिए. यह नुस्खा कब्ज के रोगी का पेट पूरी तरह से पेट साफ़ कर देता हैं. यह घरेलु नुस्खे कब्ज के लिए अति प्रभावकारी हैं.

आयुर्वेदिक व देसी घरेलु नुस्खे ही कब्ज के लिए

(15). साधारण कब्ज में रात में सोते समय करीबन 12-13 मुनक्के के बीज निकालकर, दूध में उबाल कर खाये और ऊपर से वही दूध पि लें. इससे सुबह खुलकर शौच आएगा. कब्ज की शिकायत होने पर इसे तीन दिन लगातार लें.

(16). पुराना बिगड़ा हुआ कब्ज हो तो दो संतरों का रस खाली पेट सुबह 8-10 दिन पिने से ठीक हो जाएगा. संतरों के रस में नमक, बर्फ या मसाला इत्यादि नहीं होना चाहिए. इसके साथ ही जल्दी परिणाम पाने के लिए सिर्फ सतरे के रस के सहारे उपवास करे. ऐसा करने से आपको कब्ज सहित सभी तरह के पेट के रोगों से छुटकारा मिलेगा.

कब्ज के लिए आसान और असरकारी गौ मूत्र – रोजाना सुबह खाली पेट बिना कुछ खाये. सुबह के समय पर करीबन तीन या चार चम्मच की मात्रा में गरम पानी के साथ मिलाकर पिले. इससे कब्ज का परमानेंट ट्रीटमेंट हो जायेगा यह घरेलु नुस्खे स्वदेशी हैं जरूर अपनाये.

(17). पिली काबली हरड़ को रात में बीघों दें और सुबह इस हरड़ को पानी में थोड़ा सा रगड़े और थोड़ा सा नमक मिलाकर रोगी को पीला दें. इससे कब्ज़ चाहे जितना पुराना हो, वह दूर हो जायेगा. एक हरड़ पांच छह दिन तक काम करती हैं. यह पुरानी से पुरानी कब्ज के लिए बेहतरी घरेलु नुस्खा हैं.

(18). 10 ग्राम करीबन इसबगोल की भूसी लें और इसे 125 ग्राम दही में घोलकर सुबह व शाम दोनों समय रोगी को खिलाये, इस नुस्खे से रोगी की कब्ज ख़त्म हो जायेगी.

(19). 4 ग्राम त्रिफला चूर्ण लें और इसे 200 ग्राम शुद्ध व ताज़ा गर्म दूध में मिलाये. अच्छे मिलाकर इस त्रिफ़ल+दूध के मिश्रण को पिने से कब्ज में रामबाण लाभ होता हैं. त्रिफला वैसे ही कब्ज के लिए घरेलु नुस्खे में सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता हैं.

साधारण व पुरानी से पुरानी कब्ज

(20). साधारण कब्ज – कब्ज होने पर रात को सोते समय दस बारह मुनक्के पानी से अच्छी तरह धोकर साफ़ कर बीज निकाल कर दूध में उबाल कर खाये और ऊपर से वहीँ दूध पि लें. सुबह खुलकर शौच लगेगा. भयंकर कब्ज में तीन दिन लगातार लें और बाद में जरुरत के अनुसार कब्ज खोलने के लिए इस घरेलु नुस्खे का उपयोग कर सकते हैं.

(21). त्रिफला चूर्ण चार ग्राम (एक चम्मच भर) 200 ग्राम हलके गर्म दूध अथवा गर्म पानी के साथ रात को सोते समय लेने से कब्ज दूर होता हैं.

इसबगोल की भूसी

(22). दस ग्राम दो चम्मच इसबगोल की भूसी छह: घंटे पानी में भिगोकर इतनी ही मिश्री मिलाकर रात सोते समय जल के साथ लेने से दस्त साफ़ आता हैं. इसे केवल पानी के साथ वैसे ही बिना भिगोये ही रात को सोते समय लिया जा सकता हैं.

(23). इसबगोल की भूसी पांच से दस ग्राम की मात्रा में 200 ग्राम गर्म दूध में भिगो दें. यह फूलकर गाढ़ी हो जाएगी. इसे चीनी मिलाकर खाएं और ऊपर से थोड़ा गर्म दूध पि लें. शाम को इसे लें तो सुबह मल बंधा हुआ साफ़ आएगा.

(24). कब्ज में एक दो चम्मच इसबगोल की भूसी का रोजाना रात सोते समय पानी में भिगोकर भी प्रयोग किया जा सकता हैं अहटवा इसे गर्म पानी या दूध के साथ भी लिया जा सकता हैं. दस्तों और पेचिश में इसका ताजे दही अथवा छाछ के साथ सेवन किया जाता हैं.

इस प्रकार कब्ज में पानी या दूध के साथ और दस्तों और पेचिश में दही के साथ इसका प्रयोग किया जाता हैं.

Constipation – क्या आप भी कब्ज का घर पर ही उपचार करना चाहते हैं, तो इसको अच्छी तरह से करने के लिए आपको यह लेख जरूर पढ़ना चाहिए- कब्ज का आसान घरेलु उपचार (ayurvedic & desi)

यूनानी घरेलु नुस्खे फॉर कॉन्स्टिपेशन कब्ज

(25). पेट के रोगों के लिए यह निर्दोष और श्रेष्ठ दवा हैं. यह दस्त, पेचिश और कब्ज की प्रसिद्धि और निरापद औषधि हैं और बालक से लेकर वृद्ध तक सभी को बिना किसी हानि के दी जा सकती हैं यह मल को आंतों में फुलाकर ठीक प्रकार से बाहर निकालने में सहायता देती है.

(26). अपचन के कारण आने बनने की शिकायत में निरंतर लंबे समय तक सेवन करने का परामर्श दिया जाता है क्योंकि इसके नियमित प्रयोग से अन्य विरेचक औषधियों की भांति शरीर में अन्य प्रकार के विकार साइड इफेक्ट्स नहीं होते हैं.

(27). हानि रहित जुलाब – एरंड का तेल जरुरत के हिसाब से एक से पांच चम्मच की मात्रा, एक कप गर्म पानी या दूध में मिलाकर रात सोते समय पिने से कब्ज दूर होकर दस्त साफ़ आता हैं.

(28). वयस्कों को सामान्यतः दो चार चम्मच एरंड का तेल लेना और नवजात शिशु को एक छोटा चम्मच लेना पर्याप्त रहता हैं. कठिन कब्ज वालों को आठ चम्मच एक एरंड का तेल लेना पड़ता सकता हैं और अन्य को केवल 30 बूंदों से ही पाखाना आ जाता हैं.

(29). एरंड का तेल बहुत ही अच्छा हानि रहैत जुलाब हैं. इसे छोटे बच्चे को भी दिया जा सकता है और दूध के विकार से पेट दर्द तथा उलटी होने की अवस्था में भी इसका प्रयोग बहुत हितकारी होता हैं. इससे अमाशय और आंतों को किसी प्रकार की हानि नहीं होती हैं.

इसलिए हर प्रकार के रोगी को इसे बिना किसी हिचक के दिया जा सकता हैं. इसका प्रयोग कब्ज, बवासीर, आंव के अलावा आँखों की बिमारियों और खुजली आदि चार्म रोगों में भी हितकारी होता हैं.

(30). पुराना अथवा बिगड़ा हुआ कब्ज- दो संतरों का रस खाली पेट रोजान सुबह आठ दस दिन तक लगातार पिने से ठीक हो जाता हैं.

कब्ज में क्या खाये – what to eat during constipation

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कब्ज में पथ्य – गेहूं (दो भाग) और चना (एक भाग) को मिलाकर बनाई गई मिस्सी रोटी, मोटे आते की रोटी, चोकरयुक्त आते की रोटी, चोकर की खीर, दलीय, भुने हुए चने, पालक या पालक का सूप, बथुआ, मेथी, टमाटर, सम्पूर्ण नेदयुक्त गाजर, कच्चा प्याज, सलाद, पुदीना, पपीता, चीकू, अमरुद, आंवला, संतरा, ताजे फलों का रस, नींबू पानी, देशी घी, मक्खन, दूध, दूध के साथ भिगोई हुई मुनक्का, खजूर या अंजीर, रेशेदार, फाइबर, छिलका, भुसायुक्त, पदार्थ आदि. उपरोक्त हितकारी आहार के साथ-साथ यदि निम्नलिखित कब्जनाशक सप्त नियम पालन किये जाए तो कब्ज में आश्चर्यजनक और स्थायी लाभ प्राप्त किया जा सकता हैं.

  • भोजन में आग पर पके हुए पदार्थों की मात्रा में कुछ कमी करके उसके स्थान पर हरे ताजे मौसमी फल सब्जियां, अंकुरित अन्न आदि प्राकृतिक आहार की मात्रा में वृद्धि करना
  • भोजन करते समय प्रत्येक ग्रास को खूब चबा-चबा कर खाना
  • उषा पान – यानी सुबह उठते ही खली पेट ताम्बे के बर्तन का पानी पीना
  • खाना खाने के तुरंत बाद पानी न पीकर खाना खाने के आधे घंटे बाद पानी पीना
  • रोजाना नियमित योगासन
  • रात का भोजन सूर्यास्त से पहले करना

तो दोस्तों क्या आपको कब्ज़ के घरेलु नुस्खे जोकि इन हिंदी भाषा में बताये हैं, इनके बारे में पढ़कर आपको कैसा लगा, क्या आप अभी भी कब्जियत के आयुर्वेदिक व देसी नुस्खे के बारे में और जानना चाहते हैं तो कमेंट के जरिये हमे और बताये. और साथ ही यहां कब्ज से सम्बंधित सभी लेखों को भी पड़ें constipation.

दादी मा के घरेलु नुस्खे फॉर कॉन्स्टिपेशन इन हिंदी यह पूरी तरह से आयुर्वेदिक हैं. और इनमे से बहुत से तो बहुत ही आसान नुस्खे हैं जिनको बनाने में कोई ज्यादा समय भी नहीं लगता. इसलिए जरूर अपनाइये.

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