पक्षाघात का इलाज, पैरालिसिस का उपचार, pakshaghat ka ilaj, paralysis temples in rajasthan

लकवे के मंदिर : सिर्फ 7 दिन में पक्षाघात का इलाज करे

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पक्षाघात का इलाज में लकवा का मंदिर – रोगी व उसके परिजन क्या कुछ नहीं करते, वह डॉक्टर को दिखाते है, सारी जांचे करवाते हैं, घरेलु नुस्खे व उपाय आजमाते हैं आदि लकवे से पीड़ित व्यक्ति के परिजन वह हर संभव प्रयास करने को राजी रहते जिससे उनका पक्षाघात ठीक हो जाए.

प्रणाम मित्रों – तो अब आपको अपने बेटे, बेटी, पिता, माँ आदि जिसे भी पक्षाघात (पैरालिसिस) हुआ हो उसके इलाज के बारे में चिंता करने की कोई जरूरत नहीं हैं, क्योंकि आज हम यहां आपको पक्षाघात यानी लकवा ठीक करने वाले मंदिरो के बारे में बताने जा रहे हैं.

इन मंदिरो में आकर स्नान, परिक्रमा, भभूति आदि के प्रयोग मात्र से ही लकवा के भयंकर से भयंकर मरीज भी ठीक हो जाते हैं, वह भी सिर्फ 7 दिनों में इसमें कई रोगी पूरी तरह ठीक होने में 5 सप्ताह लग जाता हैं, लेकिन पहले सप्ताह में ही 40% आराम हो जाता हैं paralysis temple rajasthan in Hindi.

नोट : यह जानकारी किसी भी रोगी की जिंदगी बचा सकती हैं, इसलिए आपसे विनम्र निवेदन हैं की आप इसे निचे व ऊपर दिए SOCIAL SHARING BUTTONS की मदद से Facebook, Whatsapp, Google Plus, Facebook के Groups में आदि, हर जगह ज्यादा से ज्यादा SHARE करे. ताकि यह जानकारी जरूरतमंद व्यक्तियों तक पहुंच जाए. यह पक्षाघात के रोगी के लिए अमृत सामान हैं, कृपया इसका मूल्य समझे.

पक्षाघात का इलाज, पैरालिसिस का उपचार, pakshaghat ka ilaj, paralysis temples in rajasthan

  • वह तो धन्य हो हमारी संस्कृति, हमारे ऋषि-मुनियों के वजह से ही यह सम्भव हैं की किसी बीमारी का इलाज मात्र भभूति, स्नान या मंदिर की परिक्रमा से ही हो जाता हैं. नहीं तो दुनिया में ऐसे कई बड़े बड़े डॉक्टर हैं, लेकिन वह इस रोग के आगे घुटने टेक देते हैं.
  • हमारे हिंदुस्तान में कई जगह पर ऐसे-ऐसे मंदिर हैं जो की अभी भी अति जिवंत हैं, वहां जाने मात्र से कई बड़े बड़े रोग नष्ट हो जाते हैं, जैसे लकवा, टाइफाइड, पागलपन, भूतप्रेत आदि. तो दोस्तों बिना अन्य चर्चा किये अब हम आगे बात करते हैं मंदिर के बारे में, भारत में कहाँ कहाँ पर स्थित हैं यह मंदिर आदि, व इन मंदिर में जाकर इस विषय में बात करते हैं.
  • “पढ़िए ऐसे चमत्कारी मंदिरो के बारे में जहां जाने मात्र से पक्षाघात ठीक हो जाता है , जो डॉक्टर भी न कर पाए वो देवीय शक्ति कर दिखाती हैं”
  • बुटाटी धाम जिला नागौर, idana mataji, आवरी माता का मंदिर, भादवा माता मंदिर आदि के बारे में.

पक्षाघात का इलाज करेंगे यह

लकवा का मंदिर

पक्षाघात के प्रकार के बारे में पड़ें –

भादवा माता – नीमच के पास

bhadwa mata mandir neemuch

  • नीमच जो की मध्य प्रदेश में स्थिति हैं, यहाँ से कुछ दुरी पर एक भादवा माता नामक लकवा का मंदिर हैं यह करीबन 800 साल पुराना मंदिर हैं. इस मंदिर में मौजूद देवी माता की मूर्ति भी काफी प्राचीन जान पड़ती हैं. इस मंदिर के समीप ही एक बावड़ी हैं, इस बावड़ी के पानी में नाहने से गंभीर से गंभीर लकवा, पक्षाघात के रोगियों का भी इलाज हो जाता हैं. मुंह का लकवा, जीभ का लकवा, पैर का लकवा, हाथ का लकवा सभी तरह के लकवा यहाँ ठीक हो जाते है.
  • यहां आये हुए लकवा के रोगी में से 90 प्रतिशत लोग संतुष्ट होकर जाते हैं. शुरुआत में यहां पर नाहने की कोई सुविधा नहीं थी लेकिन जैसे जैसे इस मंदिर के चमत्कार के बारे में लोगों को मालुम होता गया वैसे-वैसे ही यहां की सरकार ने मंदिर की व्यवस्था ठीक करवाई.
  • पैरालिसिस का भादवा माता मंदिर – यहां के पुजारी भी भील समाज के हैं उनका नाम हैं “राधेश्याम भील”. राधेश्याम जी काफी समय से इस मंदिर में सेवा करते आ आ रहे हैं उनका कहना हैं की रविवार और शनिवार के दिन रात में यहां मंदिर में देवी आती हैं, और जो भी रोगी इस मंदिर के आस पास सोते रहते हैं उनके रोग को हर ले जाती हैं. लकवा के मरीज को मंदिर के समीप ही सोना होता हैं. यहां पर बकरे मुर्गों की बली देना का भी प्रचलन हैं, कई तरह की तांत्रिक क्रियाये भी यहां पर की जाती हैं (लकवा).
  • तो मित्रों इस मंदिर में आकर यहां की बावड़ी के पानी से स्नान कर के रविवार व शनिवार की रात यहां गुजारने से हर तरह के लकवा से ग्रस्त रोगी ठीक हो जाते हैं. यहां पुरे भारत से कई लकवा ग्रस्त लोग आते हैं, आप भी आ सकते हैं क्योंकि जो रोग डॉक्टर सही न कर पाते हैं वह देवीय शक्ति कर देती हैं. यह नीमच मध्य प्रदेश में हैं, इस जगह की जानकारी के लिए आप Google में Neemuch (Nimuch) लिखकर Search कर सकते हैं. जब आप नीमच शहर में आजायेंगे तो वहां से आपको कोई भी भादवा माता मंदिर का पता बता देगा. आसानी के लिए आप कह सकते है की हम लकवा के रोगी को लेकर आये है.

लकवा में अब हम बात करते हैं ऐसे चमत्कारी मंदिर के बारे में जो की पुरे भारतवर्ष में प्रसिद्द हैं. यहां सिर्फ 7 दिन में हर तरह के पैरालिसिस ठीक हो जाता है हैं, फिर चाहे मुंह का पक्षाघात हो, आधे शरीर का पक्षाघात हो, जीभ का पक्षाघात हो, पैरों का पक्षाघात हो आदि कैसा भी पक्षाघात हो हर तरह का पक्षाघात व सभी उम्र के रोगियों के लिए यह स्थान अति उत्तम हैं, आगे पढ़िए इसी मंदिर के बारे में.

चमत्कारी बूटाटी धाम मंदिर

बूटाटी धाम मंदिर लकवा के लिए पुरे भारत में सबसे अधिक प्रसिद्द हैं.

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  • राजस्थान एक ऐसी रहस्यमय जगह हैं जहां पर कई तरह के किस्से कहानियां सुनने को मिलती हैं. ठीक इसी राजस्थान में नागौर जिले के कुचेरा ग्राम के पास में एक गांव हैं जहां पर लकवा के लिए प्रसिद्द बुटाटी धाम मंदिर स्थित हैं. करीबन 600 साल पहले यहां पर एक संत हुए थे जिनका नाम चतुरदास जी था. यह एक सिद्ध योगी थे, इन्होने अपनी तपस्या से ऐसी कई सिद्धियां प्राप्त कर रखी थी जिससे यह कैसे भी रोगी को रोगमुक्त कर देते हैं.
  • यही सिनसिला इनके परलोक गमन के बाद से चलता आ रहा हैं. आज भी कोई लकवा का रोगी संत चतुरदास जी की समाधी के चक्कर लगाता हैं तो उसका पक्षाघात ठीक हो जाता हैं. यहां पर प्रत्येक वर्ष वैसाख, भादवा और माघ में महीने भर के लिए मेला लगता हैं. लकवा के लिए इस समाधी के मात्र 7 फेरे लगाने मात्र से लकवा छूमंतर हो जाता हैं.
  • इन महान संत की समाधी के ऊपर ही यह मंदिर बना हुआ हैं. paralysis के patients को लगातार सात दिनों तक प्रत्येक दिन सुबह व शाम इस मंदिर की परिक्रमा करनी पड़ती हैं. सुबह के समय मंदिर की आरती के बाद रोगी को मंदिर के बाहर से परिक्रमा करनी होती हैं और शाम के समय आरती के बाद मंदिर में अंदर जाकर परिक्रमा लेना होती हैं. एक दिन में इस तरह सुबह व शाम परिक्रमा लेने को एक परिक्रमा में गिना जाता हैं. ऐसे ही सात दिनों तक रोगी को परिक्रमा लेनी होती हैं तब जाकर सात परिक्रमा पूरी होती हैं.
  • यह बड़ा ही विचित्र स्थान हैं, यहां कोई दवा नहीं दी जाती हैं, बस आपको परिक्रमा लेनी हैं और यहां की भभूत को अपने लकवा ग्रस्त अंग पर लगानी होती हैं. इस छोटे से प्रयोग मात्र से गंभीर से गंभीर लकवा रोग भी नष्ट हो जाते हैं. जब से लोगों को इस मंदिर के बारे में पता चला हैं यहां पर पुरे देश से लोग आते हैं और सभी प्रसन्न हो कर जाते हैं मुंह का लकवा, जीभ का लकवा, पैर का लकवा, हाथ का लकवा सभी तरह के लकवा यहाँ ठीक हो जाते है..

  • पक्षाघात में कई रोगी ऐसे भी होते हैं जो की परिक्रमा लगाने में असमर्थ होते हैं तो ऐसे लकवा रोगियों को उनके माता पिता अपने हाथो से रोगी को उठाकर परिक्रमा लगवाने में मदद करते हैं. यहां ठहरने के लिए हर तरह की सुविधा उपलब्ध हैं, विस्तार, भोजन व अन्य सामग्री सभी यहां पर निशुल्क दी जाती हैं.
  • दोस्तों जिस लकवा का वैज्ञानिक इलाज न कर पाते हो उस रोग का कम से कम समय में इलाज हो जाना कोई छोटी-मोटी बात नहीं हैं. इसलिए अगर आपको भी पक्षाघात (पैरालिसिस) हैं तो इस मंदिर में आपको जरूर आना चाहिए. यह मंदिर नागौर जिले से मात्र 40km दूर हैं, जो की कुचली नामक कसबे में हैं. आपसे किसी भी तरह के पैसे नहीं लिए जाएंगे यहां पर सब कुछ मुफ्त में होता हैं.
  • इस मंदिर के बारे में आप Google पर Search भी कर सकते हैं, व Google map की मदद से इस मंदिर तक पहुँच सकते हैं. इसी map में आपको यहां आने की सारी जानकारी मिल जायेगी. आप इन नंबर पर फ़ोन लगाकर भी यहां की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं – 01587248121

एक मंदिर जहां रोगी बेसहारा होकर आता हैं और अपने सहारे जाता हैं

  • (सा) पक्षाघात का इलाज के लिये यह जगह भी राजस्थान के क्षेत्र की ही हैं, यहां पर भी बिना किसी दवा के व बिना किसी फीस के लकवा ठीक किया जाता है. राजस्थान में जयपुर से करीबन 30 km दूर लाखना गांव हैं, इस गांव में एक चमत्कारी बरगद का पेड़ हैं. ऐसा देखा गया हैं की जो भी पक्षाघात लकवा से ग्रस्त व्यक्ति इस पेड़ की परिक्रमा लगाता हैं उसका पक्षाघात ठीक हो जाता हैं.
  • यहां के लोग कहते हैं की इस पेड़ में कोई देवीय शक्ति हैं जो की लकवा के मरीजों को ठीक करती है. ऐसा करीबन 300 सालों से चला आ रहा हैं. ऐसा माना जाता हैं की पहले यहां कोई बाबा रहते थे, जिनकी मौजूदगी आज भी महसूस की जा सकती हैं. यही बाबा इस लकवा को दूर करते हैं.
  • यहां पुरे देश से लोग आते हैं, धीरे-धीरे इस पेड़ की प्रसिद्धि के साथ यहां इसके समीप एक मंदिर भी बनवा दिया गया हैं. यहां रुकने की सारी व्यवथा दी जाती हैं. आप जयपुर में आकर लाखना गांव के लिए निकल सकते हैं, यहां तक पहुंचने में आपको कोई परेशानी नहीं आएगी. लकवा के मरीजों के लिए सब कुछ निशुल्क है.

वटयक्षिणी देवी का मंदिर

  • लकवा के लिए चितोड़गढ़ में ऐसा ही एक और मंदिर हैं जो बहुत ही प्राचीन हैं, पहले यहां एक वट वृक्ष के निचे देवी का स्थान था, लेकिन धीरे-धीरे प्रसिद्धि के साथ यहां एक बड़ा विशाल मंदिर बनवा दिया गया. इस मंदिर में 5 देवियों के स्थान हैं जो की बड़े ही चमत्कारिक हैं. यहां पर सभी तरह के लकवा और असाध्य रोग दूर किये जाते हैं जैसे पक्षाघात आदि.
  • यह मंदिर चित्तौड़गढ़ से करीबन 14 km दूर कपासन जाने वाल रास्ते पर ही हैं. आप यहां बस व अपने निजी वाहन से आसानी से पहुँच सकते हैं. राजस्थान तो क्षेत्र ही ऐसा हैं जहां पर पक्षाघात जैसे रोगों के लिए कई मंदिर हैं. आप यहां आकर किसी से भी इन मंदिरों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. यहां सभी कुछ मुफ्त में ही होगा, हाथ का लकवा, पैर का लकवा, जीभ का लकवा अन्य सभी तरह के लकवा इस मंदिर में ठीक किया जाता है.

उदयपुर इडाना माता जी का मंदिर

  • लकवा के लिए अब हम बात करते हैं राजस्थान में स्थित एक और चमत्कारी मंदिर के बारे में. यह मंदिर राजस्थान के उदयपुर से 63 KM दूर कुराबड- बम्बोरा मार्ग पर अरावली की पहाड़ियों में स्थित मेवाड़ प्रमुख एक शक्ति पीठ हैं, यहां इडाना माता जी का मंदिर हैं. यहां मौजूद सभी मेवाड़ लोगों की यह देवी आराध्य माँ हैं.
  • देवी माँ की मूर्ति महीने में दो तीन बार अपने आप ही अग्नि स्नान लेती हैं, इस स्नान में माँ की चुनरी आदि सब भस्म हो जाती हैं. यहां आने से सभी लोग और लकवा के रोगी खुश होकर जाते हैं. जिनको पक्षाघात हुआ हो, बच्चे न हो रहे हो व अन्य किसी तरह की कोई समस्या हैं तो उसका यहां समाधान मिलता हैं.
  • लोगों की मन्नते पूरी हो जाने के बाद मरीज यहां पर माता देवी को त्रिशूल भेंट करते हैं, व जिनको संतान की समस्या होती हैं वह झूला भेंट करते हैं आदि कई चीजें यहां भेंट की जाती हैं. यह बहुत ही प्राचीन मंदिर हैं. पुरे भारत देश से लोग यहां अपनी मन्नते पूरी करवाने आते हैं. आप यहां भी अपने निजी वाहन या बस के जरिये बड़ी आसानी से पहुंच सकते हैं. सभी तरह के लकवा को ठीक किया जाता है.

लकवा का कुंवर कोठरी मंदिर

  • लकवा में अब बात करते हैं मध्य प्रदेश में स्थित एक ऐसे स्थान की जहां पर हर गुरुवार को समाधी की परिक्रमा लगाने से 100% राहत मिलती हैं. पहली परिक्रमा से ही आपको असर दिखने लग जाता हैं. हमारे एक परिजन थे उनको भी मुंह का पक्षाघात (पैरालिसिस) हो गया था, इनको भी इसी स्थान पर ले जाया गया. जब यह घर से यहां के नाम से निकले तो इन्हें किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं हुआ व बड़ी ही आसानी से यहां कुंवर कोठरी पहुंच गए.
  • उन्होंने यहां आकर आरती के बाद परिक्रमा ली, तो पहले गुरुवार की परिक्रमा से ही उनमे काफी सुधार होने लगा. महीने भर में वह लकवा से पूरी तरह से स्वस्थ हो गए. यह हमारे आंखो देखि बात हैं. इसलिए हम इतने विश्वाश के साथ आपको पक्षाघात (पैरालिसिस) का मंदिर के बारे में यह सब जानकारी दे रहे हैं.
  • कोई भी लकवा का रोगी अपने घर से इनके नाम से निकलता है तो उसे किसी भी तरह की शारीरिक या मानसिक तकलीफ नहीं आती, इतना चमतकारी है यह मंदिर लकवा के लिए आप भी जरूर जाए. मध्य प्रदेश में यह लकवा का मंदिर बहुत प्रसिद्द है.
  • यहां पर सभी तरह की व्यवस्थाए हैं, आप आसानी से यह रात बिता सकते हैं. नाहने, सोने, खाने आदि सभी तरह की पूरी व्यवस्था यहां पर मुफ्त में दी जाती हैं, लकवा के लिए बस आपको यहां आने का कष्ट उठाना हैं और कोई खर्चा नहीं होगा.
  • पहले जब यह मंदिर प्रसिद्द नहीं हुआ था तो यहां आने में बड़ी बाधा होती थी, यहां आने के लिए कोई सुविधा नहीं थी, रास्ता बिलकुल खराब था. लेकिन जैसे जैसे यह प्रसिद्द हुआ, तो यह खबर यहां के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान को मिली. तो उन्होंने 2 करोड़ रुपये देकर यहां सारी व्यवस्था करवाई. तभी से यहां पुरे भारत से लोग अपना घरेलु इलाज करवाने आते हैं. हाथ का लकवा, पैरों का लकवा, जीभ में लगा लकवा, या आंख का लकवा हर तरह के लकवा यहाँ पर ठीक किये जाते है.

हनुमान जी का मंदिर

  • पक्षाघात का इलाज में अब बात करते हैं मध्य प्रदेश के बैतूल में स्थित चिचोली नगर की. चिचोली नगर से करीबन 7 km दूर एक गांव हैं, जिसे मंडई बुजुर्ग नाम से जाना जाता हैं. यह मंदिर संकटमोचन हनुमान जी का हैं. हर शनिवार व मंगलवार को इस मंदिर में कई लोग आते हैं.
  • यह जगह भी कई पुरानी हैं, पहले यहां पर एक निम् का पेड़ था, जैसे जैसे लोगों को यहां के चमत्कार के बारे में मालूम होता गया वैसे वैसे यहां लोग आने लगे. इस तरह धीरे धीरे इस जगह की प्रसिद्धि बढ़ती गई और फिर यहां पर मंदिर बनवा दिया गया.
  • इस मंदिर में भी लकवा ठीक करवाने के लिए रोगी को सात बार शनिवार या मंगलवार के दिन आना होता हैं. 7 बार सात शनिवार या मंगलवार तक आने से रोगी लकवा से रोगमुक्त हो जाता हैं. पहले दिन से ही पक्षाघात के रोगी को काफी आराम हो जाता हैं.

आवरी माता देवी का मंदिर

  • लकवा में अब हम बात करते हैं राजस्थान के ही एक और ऐसे मंदिर की जहां भी पक्षाघात इलाज होता हैं, इस मंदिर में लकवा रोगी कंधो पर आते हैं लेकिन जाते अपने कदमो से हैं. हम बात कर रहे हैं चित्तौडग़ढ़ के भदेसर कस्बे के पास असावरा गांव की. इस असावरा गांव में एक आवरी माता देवी का मंदिर हैं जो सभी तरह के पक्षाघात के रोगियों के लिए एक अद्भुत चमत्कार से कम नहीं हैं.
  • इस मंदिर तक पहुंचने के लिए सारी सुविधाएं हैं. यहाँ पर बस आती हैं व आप अपने किसी निजी वाहन से भी यहाँ आकर पैरालिसिस लकवा ठीक करवा सकते हैं. यह मंदिर भी पुरे भारत में प्रसिद्द हैं, कई जगह जगह से यहाँ लोग आते हैं. यहां पर सभी तरह के पक्षाघात रोगियों का उपचार किया जाता हैं, जैसे मुंह पर लकवा, जीभ पर लकवा, नाक का लकवा, आँख पर लकवा, हाथ पर लकवा, पैर पर लकवा, आधे शरीर का लकवा आदि हर तरह के लकवा यहाँ दूर किये जाते है. जो अंग भी आपका काम नहीं कर रहा हो वह यहां आने से दुबारा काम करने लगता हैं. यह मंदिर करीबन 800 साल पुराना हैं
  • ऐसे रोगियों को यहां मंदिर की चौखट, यानी मंदिर के सामने सोना होता हैं, ऐसा माना जाता हैं की रात के समय यहां पर देवी माता आती हैं जो की सभी रोगियों की बिमारियों को हर ले जाती हैं. जिन लोगों को संतान नहीं है, उन लोगों के लिए भी यह एक चमत्कारी मंदिर हैं यहां आने से कई लोगों को संतान प्राप्ति हुई हैं. इस मंदिर का महत्त्व नवरात्री में और बढ़ जाता हैं. नवरात्री के समय यहां पर बहुत भीड़ रहती हैं, सभी तरह के मरीज यहां अपना उपचार करवाने आते हैं.

नोट : यह जानकारी किसी भी रोगी की जिंदगी बचा सकती हैं, इसलिए आपसे विनम्र निवेदन हैं की आप इसे निचे व ऊपर दिए SOCIAL SHARING BUTTONS की मदद से Facebook, Whatsapp, Google Plus, Facebook के Groups में आदि.

  • इस पोस्ट का अगला पेज भी पड़ें, उसमे आयुर्वेदिक उपचार के बारे में बताया गया है. उसे भी आप जरूर पड़ें : NEXT PAGE

बुटाटी धाम जिला नागौर, idana mataji, आवरी माता का मंदिर आदि हमने सभी विशेष मंदिर के बारे में आपको बता दिया है. तो मित्रों आपको हमने पुरे भारत में प्रसिद्द लकवा का मंदिर पक्षाघात के उपचार के लिए paralysis temple in rajasthan के बारे में जानकारी दे दी हैं, यहां आकर आप 100% पैरालिसिस को ठीक कर सकते हैं. कई डॉक्टर भी अभी तक कई रोगियों का treatment नहीं कर पाते हैं, ऐसे में वह रोगी इन मंदिरो में जाता हैं और उसके पैरालिसिस का इलाज बड़ी ही आसानी से व चमत्कारी ढंग से पूरा हो जाता हैं.

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