बवासीर की अचूक दवा, बवासीर की दवा, बवासीर का अचूक इलाज, बादी बवासीर की अचूक दवा, bawasir ki dawa

सिर्फ 1 दिन में बवासीर की दवा से करे अचूक इलाज (खुनी बादी)

bawasir ki ayurvedic dawa

जानिये सबसे बेस्ट सरल रामबाण खूनी बादी बवासीर की दवा अचूक आयुर्वेदिक दवाई जो की 100% रामबाण हैं, इनको आप घरेलु दवा भी कह सकते हैं, क्योंकि हम यहां आपको बवासीर पाइल्स का मस्से की दवा जिसे आसानी से घर पर ही बनाया जा सकता हैं उसके बारे में बताएंगे. यह बिलकुल 101% आपको राहत देंगी व बवासीर के दर्द को दूर करेंगी, जो की सभी तरह के पाइल्स बवासीर में प्रयोग की जा सकती हैं.  यह पूरी दुनिया में कई और नहीं मिलेगा इसलिए इस पुरे ध्यान से पढ़िए.

बवासीर के मस्से के बारे में तो आप सब जानते ही होंगे की यह कितना दर्द करता हैं, इसके पीछे भी हमारी ही गलती होती हैं. अक्सर सेहत का पूरा ख्याल न रखना व नियमित दिनचर्या के जो काम हैं उन्हें समय पर नहीं करना ही इस रोग की जड़ हैं. अगर एक सामान्य व्यक्ति भी समय पर मलत्याग नहीं करेगा व कब्ज को लम्बे समय तक बने रहने देगा तो उसे भी बवासीर मस्से हो जायेंगे. फिर बाद में वह अंग्रेजी दवा लेने लगता है जिसे परेशानी और बढ़ जाती है.

आप इन घरेलु दवा के उपयोग के साथ साथ अपनी जीवनचर्या में भी थोड़ा बदलाव लाये व खाने पिने पर विशेष ध्यान दें. जैसे की ज्यादा तला गला नहीं खाना, ज्यादा भोजन नहीं करना, ठोस पदार्थ नहीं खाना आदि. और इसके साथ ही आपको फाइबर, फलों के रस आदि का सेवन ज्यादा करना चाहिए. यानी ऐसा भोजन करे जो पचने में परेशानी न दें, इससे आपको मलत्याग करते समय गुदा द्वार में अतिरिक्त दर्द नहीं होगा (अचूक इलाज).

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बवासीर की दवा का अचूक आयुर्वेदिक

इस पूरी जानकारी को ध्यान से पड़ें, क्योंकि यहां अब तक की सबसे बेहतरीन औषधि के प्रयोग के बारे में बताया गया हैं, जो की घरेलु दवा के रूप में काम करेंगी. यह सभी एक दिन में ही असर दिखाने लगेंगी व कई लोगों को थोड़ा समय ले सकती हैं लेकिन 1 से 7 दिन के भीतर आपको पूरा आराम मिल जाएगा. इसके साथ ही इस जानकारी को पढ़ने का इसे Facebook, Whatsapp, Google Plus आदि पर SHARE जरूर करें ताकि जरुरतमंदो तक यह जानकारी पहुँच सके (Badi piles).

Patanjali Bawasir Ki Dawa in Hindi

  • इस जानकारी को पूरा पढ़ लेने के बाद यह अन्य लेख भी जरूर पड़ें
  • क्या आप जानते हैं बवासीर कितने प्रकार के व किन वजहों से होते हैं, अगर नहीं, तो अभी इनके प्रकार व चरण जानने के लिए यह जानकारी जरूर पड़ें – Different Types Of Piles & Stages in Hindi
  • इस पुरे लेख को अच्छे से पढ़ लेने के बाद आप यह पाइल्स के 151 नुस्खे (Treatment At Home) भी जरूर पढियेगा, यह भी बहुत ही लाभदायक हैं. एक बार इन्हें पढ़ें जरूर ताकि आपको ज्ञान हो जाए की khuni & Badi बवासीर में कौन-कौन सी चीज किस रूप में लाभ करती हैं.
  • बहुत से लोग होम्योपैथिक इलाज के बारे में भी बात करते है, तो हमने बवासीर के होमियोपैथी उपचार के बारे में भी जानकारी दी हैं, आप उसे भी पड़ सकते हैं –  Homeopathic Treatment Of Piles
  • बवासीर का ट्रीटमेंट कर लेने के बाद यह दुबारा न हो व जिन लोगों को कभी बवासीर नहीं हुआ हैं व अगर किसी को बवासीर होने की आशंका हो तो इस रोग से बचने के लिए आप यह जानकारी जरूर पड़ें, यहाँ हमने इससे बचने के लिए आम आदमी व रोगी को क्या करना चाहिए इस विषय में बताया हैं – Piles Prevention Tips – बवासीर से कैसे बचे

 

नारियल की जटा एक दिन में फर्क देखे

  • नारियल की जटा में ऐसे चमत्कारी गुण हैं जो की बवासीर को कुछ ही दिनों में ठीक कर सकते हैं. खासकर यह नारियल जटा खुनी बवासीर दूर करने के लिए अचूक दवा हैं, साथ ही कैसा भी खून बहने वाला रोग हो उसमे यह 100% रामबाण साबित होगा जैसे की महिलाओ के मासिक धर्म के समय खून बहना, चोंट में खून बहना आदि हर तरह के खुनी रोग में यह रामबाण काम करता हैं, यह बेहतरीन घरेलु अचूक इलाज हैं, ऐसा नहीं की यह badi बादी बवासीर में लाभ नहीं देगा लाभ यह दोनों तरह के बवासीर में देगा लेकिन खुनी में ज्यादा देता हैं.
  • बवासीर के लिए सबसे पहले 1-2 नारियल लीजिये, फिर उनकी जटा यानी नारियल के ऊपरी क्षेत्र पर जो उगे हुए रहते हैं, जटा के जैसे उन्हें निकाल ले. अच्छे से पूरी नारियल की जटा को निकाल लें. इसके बाद निकाली हुई इस जटा को एक साफ़ जगह पर रख दें व माचिस की मदद से इसमें आग लगा दें. इसको पूरी तरह से जल जाने दें. जब यह अच्छे से जल चुकी होगी तो भस्म के जैसे दिखाई देने लगेगी. (यह पुरानी से पुराने बवासीर के लिए बेस्ट दवा हैं)

नारियल की जटा ऐसी होती हैं, जो की नारियल के ऊपरी क्षेत्र पर लगी होती हैं.

  • फिर इस भस्म को एक कांच की शीशी या डिब्बी में भरले. अब इसे दिन में तीन बार सुबह, दुपहर, शाम को तीन ग्राम की मात्रा में नारियल की जटा की भस्म को लेकर एक कप दूध या छाछ में मिलाकर पिए, ऐसा रोगी को सिर्फ एक ही दिन करना होगा, अब बवासीर में इसका प्रयोग एक ही दिन में तीन बार करना हैं.
  • बवासीर के लिए यह एक आयुर्वेदिक प्रयोग हैं जो किसी भी बाजार की खुनी पाइल्स की दवा से ज्यादा असरकारी हैं, भारत में व आयुर्वदा में आज भी ऐसे कई नुस्खे हैं जिनसे भयानक से भयानक रोग भी दूर किये जा सकते हैं, लेकिन इनके बारे में बहुत कम ही लोगों को पता हैं, उन्ही में से यह एक नुस्खा हैं जो की अचूक इलाज का काम करता हैं. इसके साथ ही हैजा (Cholera), वमन (Vomiting) या हिचकी (Hiccups) आदि में इस भस्म को एक गिलास पानी में डालकर रोगी को पिलाये तुरंत ही इलाज हो जायेगा.
  • इस नारियल की जटा की आयुर्वेदिक दवा का उपयोग करने से 60 minute पहले और 60 minute बाद तक कुछ भी न खाये पिए. कई रोगियों का बवासीर, बवासीर बहुत पुराना होता हैं, जिससे उनको एक दिन प्रयोग करने से कोई लाभ नजर नहीं आता तो ऐसे में पुराना खुनी बवासीर के रोगियों को इसका तीन दिन तक नियमित रूप से प्रयोग करना चाहिए.

बवासीर की दवा पतंजलि

बवासीर की पतंजलि मस्से सूखने की दवा भी बहुत मदद करती है. बाबा रामदेव ने पतंजलि में ऐसी ही कुछ आयुर्वेदिक दवाई बनाई है जिनके बारे में हम निचे आपको बता रहे है. इनका सेवन अंग्रेजी दवा से भी ज्यादा लाभ करता है ऐसा हमने कई मरीजों से जाना है.

  • Divya Arshkalp Vati – दो गोली सुबह खाली पेट गर्म पानी के साथ दिन में एक बार ली जाती हैं. इसका सेवन खुनी बवासीर और बादी दोनों में लाभ करता है. नोट : इसका सेवन लम्बे समय तक करते रहने से लाभ प्राप्त होता है, इसलिए इसका सेवन बिच में ही बंद न कर दें. Patanjali piles tablets name creams में यह सबसे ज्यादा प्रभावी बताई गई है.
  • Divya Kayakalp Vati – दो टेबलेट सुबह खाली पेट गर्म दूध या गुनगुने गर्म पानी के साथ ली जाती है, इसे दिव्य अर्शकल्प वटी के साथ ले सकते है. यह यह दवा खासकर त्वचा सम्बन्धी रोगों में दी जाती है, यह बवासीर में भी लाभ करती है क्योंकि मस्से भी गुदाद्वार की त्वचा में ही बने होते है. यह खून को साफ़ करती है, शरीर की गंदगी को ख़त्म करती है.
  • पतंजलि अलोएवेरा जेल – इस जेल को दिन में तीन बार मस्से की जगह पर लगाए यह मस्से सूखने में मदद करेगा और साथ ही बवासीर की खुजली और दर्द से भी राहत दिलाएगा.
  • Divya Churna और Divya Triphala Churna – बवासीर कब्ज से ही जन्म लेता है, इसलिए कब्ज को पहले ख़त्म करना जरुरी होता है. इसके लिए आप रोजाना यह पतंजलि चूर्ण जरूर लें. रोजाना रात को सोने से पहले इन दोनों चूर्ण को 5 या 10 ग्राम की मात्रा में लेकर गर्म गुनगुने पानी के साथ खाये तो सुबह खुलका पेट साफ़ होगा और कब्जियत नहीं बनेगी. यह बवासीर की अचूक दवा पतंजलि अंग्रेजी में बहुत लाभकारी है.

आक के पत्ते से बादी बवासीर में प्रयोग 

  • आंक के पत्तों के दूध की तीन बूंद को राइ पर डाले व इसी पर बारीक कुटा हुआ जवाखार बुरक कर बताशें में रखकर सीधा मुंह के जरिये निगल जाने से बवासीर के मस्से जड़ से ख़त्म होते हैं.
  • बवासीर में हल्दी का चूर्ण लें व इसे आंकड़े के दूध में भिगो दें, फिर जब यह सुख जाए तो इसे दुबारा आक के पत्तो का दूध डालें. बवासीर में ऐसा करीबन 7 बार करे. जैसे ही यह हल्दी का चूर्ण सुख जाए फिर इसमें आंकड़े के पत्तों का दूध डाल दें इसके बाद वापस आंकड़े के दूध में इस हल्दी के चूर्ण को भिगोकर छोटी-छोटी गोलियां बना लीजिये, व इनको सूखने के लिए छोड़ दीजिये ताकि बवासीर में इनका प्रयोग किया जा सके..
  • अब सुबह शाम दोनों समय शौच करने के बाद इन छोटी छोटी गोलियों को अपने खुद के थूंक या साफ़ पानी में अच्छे से घिसकर बवासीर के मास्सा (मस्से) पर लगाए. इसके नियमित प्रयोग से चंद दिनों में ही मस्से गिर जाते हैं. यह अचूक रामबाण प्रयोग हैं जो की सभी खुनी बवासीर और बादी बवासीर में लाभकारी होता हैं.
  • अब हम आपको आक के पत्तों का सबसे आसान व सरल सा प्रयोग बताने जा रहे हैं, इसे आप बड़ी ही आसानी से कर सकते हैं. रोजाना सुबह शाम मल त्याग करने के तुरंत बाद ही थोड़े 6-7 आंक के पत्ते ले लीजिये व गुदाद्वार पर इन पत्तों को रगड़े, इन पत्तों को इस तरह रगड़े की मस्सों पर पत्तो का दूध न लगे. रोजाना के प्रयोग से आपको कुछ ही दिनों में लाभ दिखने लगेगा (Ark leaves for badi bawasir).

बवासीर में नीबू का प्रयोग

cow milk and lemon for piles

  • यह प्राकृतिक दवा हैं, बहुत ही सरल व आसान और असर में रामबाण. अगर आप यहां बताये किन्हीं आयुर्वेदिक नुस्खे से इलाज करने में हिचकिचाते हैं तो यह जरूर आजमाए क्योंकि यह बहुत आसान हैं. बवासीर के रोगी को रोजाना सुबह खाली पेट एक नीबू को धारोष्ण दूध यानी ताज़ा दूध, इसे गर्म नहीं करना हैं सामान्य ठंडा ही पीना हैं, ना इसे गर्म करना है और ना ही फ्रिज में रखना हैं.
  • जैसे ही दूध आये वैसे ही उसमे एक नीबू डालिये और पीजिये. बवासीर में इस प्रयोग को  7 दिनों तक करना हैं , 7 दिनों में आपका इलाज हो जायेगा. वैसे अगर आपका रोग नया व कमजोर होगा तो 1 दिन में ही आराम हो जायेगा. इस तरह नीबू और दूध बवासीर का छुटकारा करते है.

केला और कपूरऔर बवासीर 

kela or kapoor bawasie ke liye

  • बवासीर से छुटकारा पाने के लिए एक केला लीजिये और उसमे खाने वाली कपूर मिला दीजिये. जी कपूर दो तरह की होती हैं एक जलाने वाली और एक खाने वाली तो आपको खाने वाली कपूर की जरूरत हैं तो आप इसे लाइए और चने की मात्रा में लेकर एक केले को बिच में से काटकर उस पर लगा दीजिये.
  • इसके बाद इस केले को सीधा ही निगल जाइये. ऐसा रोजाना सुबह खाली पेट करे, 5-7 दिन में आपको ढेर सारा लाभ हो जाएगा. यह बहुत ही पूर्ण और रामबाण दवा का उपाय हैं, खुनी बवासीर व बादी बवासीर दोनों तरह के बवासीर से मुक्ति दिलाता है.

नाग दोन और खुनी बवासीर

नाग दोन

  • खुनी बवासीर की दवा के लिए आप नाग दोन नामक एक पौधा होता हैं, जो की घर में कई लोग गमलो में लगाकर रखते हैं. इस पौधे में ऐसे गुण होते हैं की अगर कोई रोगी जिसके शरीर में किसी भी अंग में से खून बह रहा हो तो इसके 4-5 पत्तों को चबाकर खाये तुरंत ही खून बहना बंद हो जायेगा. यह खुनी बवासीर का तुरंत खून बंद कर देता हैं. इसलिए आप इसे जरूर आजमाइएगा. करना कुछ नहीं है, बवासीर के लिए इस पौधे के पत्ते तोड़कर चबाकर खाना है बस खुनी बवासीर में बह रहा खून इससे तुरंत ही रुक जायेगा.  ये भी एक bawaseer ki dawa patanjali की तरह असर करती है, आप इसका प्रयोग कर सकते है.

कुकरौंधा भी हैं मस्से की अचूक दवा आयुर्वेदा का इलाज

  • कुकरोंधा बवासीर के मस्से की अचूक दवा का काम करता हैं, इसमें भी ऐसे ही चमत्कारी गुण हैं जो की बवासीर का तुरंत कुछ ही दिनों में अचूक इलाज कर सकते हैं. कुकरोंधा के पत्ते बिलकुल तम्बाकू के पत्ते के जैसे लंबे व थोड़े गहरे रंग में पाए जाते हैं. जब यह पत्ते छोटे होते हैं यानी शुरुआत में मूली के सामान होते हैं. इन पत्तों में बेहद बदबूदार बू आती हैं, इसका स्वाद थोड़ा कड़वा जरूर होता हैं लेकिन यह हर प्रकार से सेहत के लिए और खुनी बवासीर व बादी बवासीर दोनों तरह के बवासीर के लिए लाभकारी होता हैं.
  • बवासीर की घरेलु दवाई रामबाण – अगर किसी व्यक्ति को किसी तरह का खुनी रोग हैं या खून का दोष हैं तो उस रोगी को इसके पत्तों का 20 ग्राम रस पिलाने से व शरीर में जहां खून निकल रहा हो वहां पर लगाने से यानी मलने से बहुत लाभ होता हैं. कुकरोंधा के पत्तों (leaves) को बवासीर में मस्से पर लगाने से भी बहुत फायदे होते हैं, यह खुनी बवासीर एवं badi bawaseer ki dawa (bataye) की तरह काम करता हैं. इसलिए बवासीर के रोगी को इसका सेवन जरूर करना चाहिए.
  • बवासीर में 2 ग्राम कुकरौंधा के पत्ते लें व इतनी ही मात्रा में काली मिर्च और गेंदा के पत्ते भी लें. अब इन सभी को आपस में मिलाकर साफ़ पिने के पानी के साथ मिलाकर अच्छे से घोलकर पिने से मास्सा का अचूक रामबाण इलाज होता हैं.
  • प्राकृतिक सबसे अच्छी खुनी बवासीर की दवा – खून निकलने वाले मस्से के लिए कुकरौंधा का रस 5 मिलीलीटर की मात्रा में लें, इसके बाद कालीमरिच का चूर्ण 500 ग्राम की मात्रा में लेवे. अब इन दोनों को आपस में मिलाकर खाने से खुनी बवासीर रक्तसिर मस्से में अचूक लाभ होता हैं. (खुनी बवासीर में इसे आधा ग्राम की मात्रा में भी किया जा सकता हैं).
  • इसके साथ ही खुनी बवासीर में रोगी को कुकरौंधा के 6-11 पत्तो के रस में मिश्री घोलकर व अच्छे से मिक्स कर के रोगी को पिलाने से मस्से में खून आना बंद हो जाता हैं. यह सभी बवासीर को जड़ से मिटाने का इलाज की दवा हैं. इनका प्रयोग एक दिन करे फिर और भी आपको फर्क मालुम न हो तो इनका प्रयोग तीन दिन तक नियमित करे. इस बिच अगर आपको इससे कोई साइड इफ़ेक्ट मालूम हो तो प्रयोग को बिच में ही रोक दें, वैसे यह साइड इफेक्ट्स न के बराबर ही देता हैं.
  • बवासीर की लिए 6-7 साथ माशे यानी चिमटी भर मिश्री लें और 10 ग्राम कुकरौंधा के पत्तों का रस लें, इन दोनों को आपस में मिलाकर पिने से खासकर खुनी बवासीर का जड़ से रामबाण उपचार होता हैं.
  • यह खुनी बवासीर की दवा के तरह काम करता है, इसलिए जिनको भी खून वाला bawaseer है वह इसका उपयोग जरूर करे.

आकड़े के पत्ते हैं Badi Bawaseer Ki Dawa के लिए

  • आकड़े जिसे अन्य नामो से भी जाना जाता हैं जैसे आक, आंकड़ा आदि. इस पेड़ के फूल व पत्ते शिव भगवान् को चढ़ाये जाते हैं. यह पौधा बड़ी ही आसानी से कहीं भी मिल जाता हैं. इसके पत्ते व डालियां तोड़ने पर इसमें से सफ़ेद दूध के जैसा पदार्थ निकलता हैं, तो यह तो रही आक के पौधे की पहचान अब हम बवासीर में इसके महत्त्व के बारे में बताते हैं.
  • आयुर्वेदा में आंकड़े के पौधे के कई उपयोग हैं, यह एक रामबाण दवा के रूप में कई रोगों को जड़ से मिटाने की क्षमता रखता हैं. आज यहां आपको आंकड़े का ऐसा ही प्रयोग बताने जा रहे हैं जो की बादी बवासीर का अचूक इलाज करने में रामबाण साबित होगा. इस आयुर्वेदिक दवा के उपाय से आप 3 से 5 दिनों के भीतर से बादी बवासीर का जड़ से खात्मा कर सकते हैं.
  • इस दवाई को बनाने के लिए सबसे पहले पांचो तरह के नमक लाने होंगे यानी सेंधा नमक (Halite), सौंचर सुर्वचल नमक (Suncr Surwcl salt), काला नमक (black salt), सेंधा नामक, बिड नमक (Bid salt), समुद्री नमक (sea ​​salt), सांभर नमक (Sambar Salt) इन पांचो तरह के नमक को आप किसी किराना की दुकान से आसानी से खरीद सकते हैं. यह आम सामान्य दुकान पर आसानी से उपलब्ध होते हैं.
  • नमक ले आने के बाद सभी पांचों तरह के नमक में से 11-11 ग्राम नमक अलग निकाल लें. अब इसी अनुपात में आक के पत्ते ले लीजिये. यानी 55 ग्राम आक के पत्ते लीजिये. अब नमक और आक के पत्तों के वजन के चौथाई हिस्से के बराबर की मात्रा में तिल का तेल और निम्बू का रस लीजिये. अब इन सभी को आपस में मिला लें. इसके बाद एक मिटटी का मटका लें और उसमें इन सभी चीजों को डाल दें. (बवासीर की लिए मिटटी के मटके को उपयोग में लाने से पहले उससे अच्छे से साफ़ कर लें) .
  • इन सभी चीजों को मिटटी के मटके में डालने के बाद मटके का मुंह सूती कपडे से बंद कर दें. (यानी सूती कपडे को मटके के मुंह पर बांध दें, इसको बांधने में आप रस्सी का उपयोग कर सकते हैं. कपडे को बांधने के बाद उस पर गीली मिटटी लगा दें, ताकि कोई भी कीड़ा इस मटके के अंदर प्रवेश न कर सके पुरे कपडे पर मिटटी लगा दीजिये).

  • इस सब के बाद गोबर के कंडे लाये, व गोबर के कंडो पर मटके को रख दें. यानी गोबर के कंडो पर इस मटके को सेंकना हैं. इसके लिए आप घर पर ही छोटा सा चूल्हा बना सकते हैं. तीन चार इंट आस पास रख कर बिच में कंडे रख दें व ईंटों के ऊपर मटके को रख दें.
  • इसके बाद आपको यह खास ध्यान रहे की मटके को तेज आंच में नहीं सेंकना हैं, क्योंकि तेज आंच में सेंकने से मटका टूट सकता हैं. इसलिए कम कंडे रखे व जैसे ही कांडा जल जाए तो दूसरे कंडो के टुकड़ों को उस आग में डालते जाए. इस मटके को गोबर के कंडो पर करीबन 1 घंटे तक सेंकना हैं. इसलिए पहले से ही इतने कंडो की व्यवस्था कर लें की यह एक घंटे तक कम न पड़ें. फिर एक घंटे बाद इस मटके को आग से उतार लें.
  • एक घंटे तक आग में सिंकने के बाद आकंड़े के पत्ते(leaves) जल चुके होंगे, अब आप इन सभी चीजों को मटके में से बाहर निकाल लें, व इन सभी को आपस में मिलाकर अच्छे से पीस लें. पीसने के बाद इस सुरक्षित स्थान पर रखलें.
  • 1 ग्राम से 2-3 की मात्रा में जितनी रोगी की उम्र हो उस हिसाब से ले लीजिये. अब इस चूर्ण  को गरम पानी, पिने की छाछ, कांजी आदि के साथ इसको ले सकते हैं. यह रामबाण देसी दवाई हैं, इसीलिए इसको बादी बवासीर दूर करने की अचूक दवा मानी जाती हैं. आपको रोज रोज इस दवा को बनाने की कोई जरूरत नहीं हैं, एक बार में ही यह काफी बन चुकी होगी, इसी का उपयोग करते रहिये. बड़ी बवासीर के अलावा इसे खुनी बवासीर में भी प्रयोग में लाया जा सकता है.

अखरोट बवासीर के दर्द को दूर करने की दवा

  • अखरोट भी बवासीर के लिए एक रामबाण औषधि के सामान हैं. यह भी बवासीर में कई तरह से लाभ देता हैं जैसे बवासीर का दर्द, बवासीर के मस्से में दर्द, बवासीर के मस्से में खून निकलना आदि. खासकर अखरोट खुनी बवासीर के लिए बहुत ही असरकारी हैं. इसके साथ ही बवासीर के लिए बहुत ही उपयोगी हैं. तो चलिए आगे इसके आयुर्वेदिक प्रयोग के बारे में जानने की कोशिश करते हैं.
  • कई बार बवासीर के रोगी को मस्सों में तेज दर्द होता हैं जो की असहनीय होता हैं. इससे घर पर बवासीर का दर्द दूर करने के लिए आप अखरोट के इस प्रयोग को आजमा सकते हैं, यह बहुत ही आसान सरल सा प्रयोग हैं. जब भी आपको दर्द होने लगे तो अखरोट के तेल को लेकर एक पिचकारी या इंजेक्शन सिरिंज में लेकर अपने गुदा द्वार पर तेल की धार लगाए. यानी बवासीर के लिए अखरोट के तेल की पिचकारी मलद्वार पर लगाए.
  • जब भी बवासीर में खून निकलने लगे तो आप अखरोट के इस प्रयोग को जरूर आजमाए. अखरोट लीजिये व उसके ऊपर की छाल को अलग निकाल लीजिये. ध्यान रहे हमे सिर्फ अखरोट की छाल का उपयोग करना हैं अखरोट की गिरी का नहीं इसलिए अखरोट की गिरी को अलग निकाल दीजिये व इसे प्रयोग में मत लाइए.
  • हाँ तो अखरोट की छाल को निकालने के बाद इसको जला दीजिये. इसे तब तक जलने दें जब तक यह जलकर भस्म न हो जाए. इसके बाद रोजाना सुबह के समय मट्ठे, छाछ के साथ और सांयकाल ताजा पानी के साथ इस भस्म को लीजिये. इसके एक दो दिन के प्रयोग से ही आपको कई लाभ नजर आने लगेंगे. मस्से में से खून निकलना बंद हो जाने के बाद इस प्रयोग को बंद कर दें, इस बिच कोई साइड इफेक्ट्स हो तो प्रयोग को बिच में ही रोक दें.
गौ मूत्र और छोटी हरड़ : बवासीर का चूरन

  • आप बवासीर के लिए छोटी हरड़ 25 ग्राम की मात्रा में लीजिये, इसके बाद 1-2 गिलास देसी गाय का मूत्र लीजिये. इन दोनों को लाने के बाद एक कांच के गिलास में यह गौमूत्र डाल दीजिये, फिर इसमें छोटी हरड़ को डाल दीजिये. इसको डालने के बाद अगले दो दिन छोटी हरड़ को इस गौमूत्र में पड़ी रहने दीजिये. फिर दो दिन बाद इस छोटी हरड़ को गौमूत्र में से निकालकर दो तीन दिन के लिए छाया में सूखने के लिए छोड़ दीजिये. (खुनी बवासीर एवं बादी बवासीर दोनों तरहे के बवासीर में अत्यंत लाभ देंगे)
  • जब तीन दिन हो जाए तो उसके बाद इस छोटी हरड़ को अच्छे से बारीक पीसकर चूर्ण बना लीजिये. अब इस चूर्ण को रोजाना सूर्योदय के बाद खाली पेट और रात्रि को सोते समय आधा चम्मच की मात्रा में गुड़ लीजिये और इस गुड़ को चूर्ण के साथ मिलाकर खा लीजिये. बवासीर के इस प्रयोग को करने के बाद 16-17 मिनट के बाद गुन-गुना पानी न ज्यादा गर्म और न ज्यादा ठंडा को पिलीजिए. जल्दी ही आपको बवासीर रोग में आराम होने लगेगा.

अंजीर का इस्तेमाल बवासीर

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  • बवासीर से छुटकारा पाने के लिए बाजार से थोड़े अंजीर ले आये व इस तरह प्रयोग करिये घरेलु दवा (बवासीर _क्योर) बादी बवासीर में काम करेगी. रोजाना नियमित रूप से दो अंजीर शाम के समय एक गिलास पानी में भिगोकर रख दीजिये, फिर अगली सुबह भोजन करने के करीबन 1 घंटे यानी 60 मिनट के बाद इन अंजीर को ख़ालिजिये.
  • यह तो रहा एक समय का प्रयोग अब शाम को अंजीर का सेवन करने के लिए रोजाना सुबह के समय दो अंजीर एक गिलास पानी में भिगोकर रख दीजिये फिर रोजाना शाम को करीबन 4-5 बजे के लगभग इनका सेवन करिये. अंजीर को खाने के 45-60 मिनट तक कुछ भी न खाये पिए, बस इस दवा में यही परहेज हैं.
बार बार बवासीर पुराने बवासीर के लिए

  • पुराने बवासीर के लिए ऐसे कई रोगी हमने देखें हैं जिनका एक बार बवासीर ठीक हो जाए तो कुछ समय बाद फिर से उन्हें बवासीर हो जाता हैं. यानी उन्हें बार-बार बवासीर होने की शिकायत हो जाती हैं. तो इसके लिए भी हम आपको पुराने से पुराना बवासीर की लिए असरकारी दवा जो की बवासीर का जड़ से छुटकारा दिलवाएगी उसके बारे में बताएंगे यह बहुत ही सरल हैं.
  • कब्ज, मस्से, अपचन आदि सभी तरह के पेट के रोगो के लिए छाछ सबसे अच्छी होती हैं, यही बवासीर में भी लाभ देती हैं. रोजाना दुपहर का खाना खाने के बाद करीबन डेढ़ ग्राम की मात्रा में अजवाइन जो की पीसी हुई होनी चाहिए, को मिलाये व इसमें 1 ग्राम सेंधा नमक भी मिलाइये.
  • इन सभी को बवासीर के लिए छाछ में मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लें और पि जाए. रोजाना इस प्रयोग को करने से पुराने से पुराना बवासीर भी नष्ट हो जाता हैं. यह आयुर्वेदिक दवा के रूप में बहुत ही असरकारी प्रयोग हैं. इसके साथ ही बवासीर के रोगी को बोले की वह भोजन के साथ मूली के पत्ते भी खाये, हो सके तो रोगी को एक समय मूली के पत्तों की ही सब्जी खिलाये इससे बवासीर में अत्यंत लाभ होगा, दुहरा उपचार होगा.

अन्य प्राकृतिक व अचूक आयुर्वेदिक दवा

  • बवासीर में कड़वी तोरई का रस लें और इस रस में हल्दी में मिला दें, अच्छे से मिक्स कर लेप बना लें व फिर इस लेप को बवासीर के मस्से पर लगाए इससे पाइल्स का अचूक इलाज होगा मस्से दूर हो जायेगे. इसके साथ ही अगर रोगी नीम तेल को भी इसमें मिलाकर मस्सों पर लगाए तो और कई ज्यादा लाभ होंगे.
  • बवासीर रोग में आंकड़े के पत्ते सहजन के पत्ते दोनों को मिलाकर इनका लेप बना लें व इनको मस्सों पर लगाए यह लेप बवासीर की घरेलु दवाई की तरह काम करेगा बवासीर के मस्सों में बहुत आराम मिलेगा.
  • थोड़ा जीरा लें व इसे अच्छे से भून लें और इसमें अपने स्वाद के मुताबिक मिश्री मिला दें, अब इसे चूसें. जीरे जो की बिना भुने हुए हो, ऐसे जीरे को लेकर साफ़ अच्छे पानी के साथ लेकर पीस लें, इसके बाद मस्सो पर लेप करे. यह दोनों प्रयोग करने से बवासीर का दोहरा अचूक इलाज होगा जो की किसी भी मेडिकल की अंग्रेजी दवा से ज्यादा लाभकारी हैं देसी दवा.
  • रोजाना सुबह और शाम दोनों समय आंवले का चूर्ण शहद के साथ ले, इससे खून बवासीर एवं बादी बवासीर दोनों तरह के बवासीर में बहुत फायदा होता है.
  • हरड़ और गूढ़ दोनों को साथ में मिलाकर खाने से बवासीर के मस्से जल्दी ख़त्म होते हैं.
  • मूली का किसी भी रूप में बवासीर पाइल्स के रोग को सेवन करते रहना चाहिए, जितना ज्यादा मूली के पत्तों व मूली का सेवन होगा उतना ही बवासीर में लाभ भी होगा.
  • बकरी के दूध का सुबह के समय सेवन करने से खुनी बवासीर अत्यंत लाभ होता हैं, यह देसी दवा से कम नहीं. अगर आप ग्रामीण क्षेत्र या ऐसे क्षेत्र के हैं जहाँ बकरी का दूध आसानी से मिल जाता हैं तो इस उपाय को जरूर करे.
  • छाछ, मट्ठे, दही आदि का भोजन के बाद सेवन जरूर करें
  • कमल के हरे पत्ते को अच्छे से पीसलें व इसमें थोड़ी मिश्री मिला लें, इसके सेवन से बवासीर में खून बहना तत्का बंद हो जाता हैं.
  • काले तिल लें एक ग्राम और शुद्ध एवं ताज़ा मक्खन भी एक ग्राम की मात्रा में ले, दोनों को अच्छे से मिलाकर खाये, इसको रोजाना 8-10 दिनों तक रोजाना सुबह के समय नियमित रूप से आजमाए.
  • 55 ग्राम बड़ी इलाइची लें और इसे तवे पर रख कर जला दें, जब यह ठंडी हो जाए तो तवे पर से उतार कर इसे बारीक पीस लें. अब यह आयुर्वेदिक दवा बन गई हैं. इसको सुबह के समय तीन ग्राम की मात्रा में 15 दिनों तक शुद्ध एवं ताज़ा पानी के साथ लें बहुत लाभ होगा.
  • बवासीर के रोगी को प्याज का सेवन भी अधिक करना चाहिए, प्याज की चटनी भी अधिक खाना चाहिए.

उम्मीद करते हैं दोस्तों आपको यह सालों साल पुराने आयुर्वेदा के रामबाण नुस्खे जिससे आप खुनी व बादी बवासीर की अचूक दवा bawaseer ki dawa patanjali in Hindi बनाकर प्रयोग कर सकते हैं, सही तरीके से प्रयोग करने पर यह पतंजलि और अंग्रेजी दवाइयों से भी ज्यादा फायदा करेंगी. इनके जरिये आप बिना किसी ऑपरेशन के ही घर पर इन्हे ख़त्म कर सकते है.

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